राष्ट्रपति ने कानपुर देहात के पुखरायां में संबोधन से ठीक पहले जिलाधिकारी जेपी सिंह से कहा कि कैंप लगाकर एक-एक व्यक्ति का टीकाकरण कराएं। अगर महामारी से एक भी अपना चला जाता है तो टीकाकरण की बात करना बेईमानी होगी। राष्ट्रपति ने इस बात का जिक्र संबोधन में भी किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने दोनों डोज लगवा ली हैं। जिसने भी टीका नहीं लगवाया है, वह टीका लगवाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए। साथ ही परिवार वालों, मिलने वालोें को भी टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि कोरोना अदृश्य बीमारी है। न जाने कितने अपनों को इसने छीन लिया है। इसलिए लापरवाही बिल्कुल न बरतें। दो गज की दूरी बनाएं। मास्क लगाएं और टीका लगवाएं।
कोरोना प्रबंधन पर मुख्यमंत्री की सराहना
राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। यहां घनी आबादी वाले शहर हैं। ऐसे में कोरोना का खतरा अधिक हो सकता है। मगर मुख्यमंत्री ने अपने प्रयासों से कोरोना के प्रकोप को कम करने में सफलता पाई है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर भी आने की आशंका है। इसलिए कोरोना प्रोटोकॉल को फॉलो करें। इसके अलावा उन्होंने योग को भी जीवन का हिस्सा बनाने की बात कही।
शुभचिंतकों को मेरा धन्यवाद
राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ समय पहले मेरी तबीयत खराब हुई थी। अस्पताल में रहना पड़ा था। कानपुर देहात से तमाम संदेश मिले थे। पता चला था कि पुखरायां में मेरे बेहतर स्वास्थ्य के लिए विशेष अनुष्ठान किया गया। मैं इसके लिए सभी को धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि वे जब बिहार के राज्यपाल थे, तब 2016 में डॉ. अवध दुबे के नेत्र चिकित्सालय के उद्धघाटन में आए थे। आज पता चला कि ये चिकित्सालय लोगों की सेवा कर रहा है।
कई अपने छोड़कर चले गए
राष्ट्रपति ने कहा कि आज मेरे कई अपने छोड़ के चले गए हैं। इसमें सत्यनारायण सचान, राजाराम तिवारी, उदय नारायण अग्रवाल, डॉ. विसंभर सचान, डॉ. धर्मनारायण अग्रवाल, सीताराम गोयल, अरविंद सचान, और कमलरानी वरुण हैं। इन सभी को राष्ट्रपति ने श्रद्धांजलि भी अर्पित की।