कानपुर। शिक्षक के घर हुई लूट के बाद पुलिस बाइक सवार बदमाशों की तलाश में फुटेज खंगाल रही थी। इसी बीच एक फुटेज में रिश्ते का साला मोनू अपने साथियों के साथ लोडर में नजर आया। पुलिस की शक की सुई उस पर घूम गई। वह वारदात वाले दिन शिक्षक के घर पर था। उन्होंने सबसे पहले प्रशांत उर्फ मोनू को पकड़ा। इसके बाद बाकी के बदमाशों के नाम सामने आते चले गए। मोनू ने पुलिस ने बताया कि वारदात को अंजाम कमल, रफीक और शफीक ने दिया था, जबकि विजय और वह खुद शिक्षक के मकान से कुछ दूरी पर ऑटो में बैठकर साथियों का इंतजार कर रहे थे। वारदात के बाद घर से बाहर निकले तीनों बदमाशों ने चोरी की अपाचे बाइक को बीच रास्ते में कहीं छोड़ा और पांचों में से दो ऑटो और तीन कमल के लोडर की मदद से श्यामनगर से बाहर निकल गए। वहीं पुलिस बाइक की तलाश करती रही। अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा के मुताबिक पांचों पर पूर्व में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रशांत की मुलाकात दो वर्ष पूर्व रफीक से जेल में हुई थी। उसके ऊपर कई आपराधिक मामले हैं। कुछ दिन पहले जेल से छूटे रफीक ने प्रशांत से कोई टारगेट पूछा तो उसने अपने ही जीजा शरद का घर दिखा दिया।
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बोला था...जीजा पढ़ाई में कर रहे हो कमाई
शरद ने बताया कि करीब डेढ़ माह पूर्व प्रशांत उर्फ मोनू उनके घर मलमास के पुआ देने आया था। उस दिन पत्नी रचना ने काफी गहने पहन रखे थे। बस वहीं से मोनू की नियत खराब हो गई और उसने उन्हीं के घर पर लूट की साजिश रच डाली। शिक्षक के मुताबिक इससे पहले भी जब उन्होंने अपने स्वर्ण जयंती विहार स्थित नए मकान में पूजन कराया था, तब भी प्रशांत उसमें शामिल था। उस दिन वह मजाक में बोला भी था कि जीजा पढ़ाई में कमाई रहे हो। क्या पता था कि एक दिन वह उन्हीं का घर साफ करने की सोच लेगा।
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पुलिस के सामने घूमता रहा शातिर
मोनू पुलिस को गुमराह करने के लिए सोमवार को घटनास्थल पर भी पहुंचा था। वह देर शाम तक अपने जीजा शरद के घर पर ही मौजूद था। इससे किसी को भी उस पर शक नहीं हुआ। पुलिस अधिकारियों के आगे पीछे लगा हुआ था। मोनू ने पुलिस को बताया कि वारदात के बाद साथी रफीक, शफीक, विजय और कमल ने उसको लूटी गई सारी आर्टिफिशियल ज्वैलरी होने की बात कही थी। इस पर मोनू ने साथियों को धमकी दी थी कि वह पुलिस के पास जाकर खुद ही पूरी सच्चाई कबूल देगा।
राहत मिली मगर बड़ी तकलीफ के साथ
शरद ने पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि लुटेरे पकड़े गए इससे उन्हें राहत तो हुई है, लेकिन इस बात की तकलीफ भी है कि अपने ही रिश्तेदार ने उन्हें बर्बाद करने की योजना बनाई थी। वारदात के वक्त उनकी पत्नी और बेटे की जान पर भी बन सकती थी। फिलहाल आज जमाना किसी पर विश्वास करने का नहीं है।