संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। समय के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल के तरीके भी तेजी से बदल गए हैं। कभी नकल केवल पर्चियों, किताबों के पन्नों या हाथ पर लिखे नोट्स तक सीमित थी अब तकनीक ने इसे हाईटेक बना दिया है। आजकल परीक्षा केंद्रों में ब्लूटूथ, माइक्रो स्पाई डिवाइस और मोबाइल-आधारित सेटअप जैसे उपकरणों के जरिए नकल की कोशिशें सामने आ रही हैं।
अब केवल नकल बनाम नियम नहीं, बल्कि तकनीक बनाम निगरानी की लड़ाई चल रही है। पहले नकल करने के लिए अभ्यर्थी अक्सर पर्चियों को कपड़ों, जूतों या हाथों में छिपाते थे। लेकिन कड़ी निगरानी और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बाद पारंपरिक तरीके काफी हद तक सीमित हो गए हैं। बीते कुछ सालों में नकल का तरीका बदला और मोबाइल फोन इसका मुख्य साधन बन गया। प्रश्न पत्र बाहर भेजकर उत्तर प्राप्त करने का नेटवर्क शुरू हुआ जिसमें परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे लोग मदद कर रहे हैं। इसके लिए परीक्षा कक्ष में बैठा अभ्यर्थी ब्लूटूथ ईयरपीस जैसे उपकरण कान के अंदर छिपाकर बाहर बैठे व्यक्ति से सीधे संवाद करता है। वह प्रश्नों को पढ़कर उसे बताता है जबकि बाहर बैठा व्यक्ति एआई की मदद से उन प्रश्नों को हलकर उनके जवाब उसे बताता रहता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अभ्यर्थी जिन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की मदद ले रहे हैं। वह इतने सूक्ष्म होते हैं कि सामान्य जांच में पकड़ में आना मुश्किल हो जाता है।
कोट::
हाइटेक तरीके से नकल करने और कराने की कोशिश की जाती है। इसे रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर और ज्यादा सख्ती बरती जाएगी।
-डॉ.विपिन ताडा अपर पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था