कानपुर। अब आपकी थाली रंग बिरंगी पोषण से भरपूर सब्जियों और अनाज से सजेगी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में बुधवार से आयोजित किसान मेले में वैज्ञानिकों ने जहां नई प्रजातियों को प्रस्तुत किया वहीं किसान भी अलग अलग किस्में लेकर आए।
सीएसए ने लाल भिंडी, जमुनिया आलू, बारामासी करेला, मशरूम और इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने शुगर के मरीजों के लिए काला नमक चावल की जानकारी दी। कानपुर देहात से आए किसान की रागी छाछ, गोमूत्र से तैयार अर्क और फिनायल चर्चा का केंद्र रहा।
सीएसए में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए। यहां बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के लगभग 32 जनपदों से 5000 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया।
मेले का शुभारंभ उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने किया। उन्होंने सभी स्टालों का भ्रमण कर कृषि तकनीकों को देखा। इसके पूर्व उन्होंने प्रदेश के 10 प्रगतिशील कृषकों को भी सम्मानित किया।
डॉ. सिंह ने कहा कि हरित क्रांति में सीएसए का बड़ा योगदान है। किसानों की उन्नति में ऐसे मेलों की बड़ी भूमिका रहती है। उन्होंने बताया कि विवि की ओर से सरसों की वरुणा सहित अन्य फसलों की नई प्रजातियां विकसित की गई हैं जो जलवायु अनुकूलन भी हैं।
उन्होंने मक्का व आलू की खेती पर विशेष बल दिया। विशिष्ट अतिथि आईसीएआर अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. शांतनु कुमार दुबे ने कहा कि किसान कृषक मेलों के माध्यम से नई तकनीक सीख कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
इस अवसर पर प्रसार निदेशालय की ओर से पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। अतिथियों का स्वागत निदेशक प्रसार डॉ. आरके यादव ने किया। धन्यवाद डॉ. वीके कनौजिया ने दिया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. सीएल मौर्य, डॉ. विनोद प्रकाश, डॉ भूपेंद्र सिंह, डॉ. पीके राठी, कृषक समिति के अध्यक्ष बाबू सिंह, महिला कृषक समिति की अध्यक्ष डॉ विजय रत्ना तोमर उपस्थित रहे।
कैंसर से लड़ेगा गोमूत्र से तैयार अर्क, फिनायल से मारेंगे कीट
कानपुर देहात के रसूलाबाद से आए श्रीगोपाल गोशाला के प्रबंधक फूल सिंह अपने साथ श्रीअन्न के काफी उत्पाद लाए। विशेष रूप से रागी से तैयार छाछ, कोदो की कचौड़ी, गाय के गोमूत्र से तैयार अर्क और फिनायल, सांवा के चावलों की खीर के प्रति लोगों की उत्सुकता देखी गई। फूल सिंह ने बताया कि गाय के मूत्र से तैयार अर्क को पीने से टीबी, लीवर, कैंसर जैसी बीमारियों से भी लड़ा जा सकता है। इस अर्क के वेस्ट में कुछ तत्व मिलाकर इसका फिनायल तैयार किया जाता है। रागी की छाछ से कैल्शियम और आयरन की कमी दूर होती है। इसके अलावा देसी गिरि गाय के दूध से बनी छाछ, दही, देसी घी की भी काफी मांग रही। इसमें कैरोटीन की मात्रा अधिक होती है।
जमुनिया आलू में शुगर की मात्रा कम
वनस्पति विज्ञान से पीएचडी कर रही अंकिता तिवारी ने लाल भिंडी, बारामासी करेला, जमुनिया आलू सहित अन्य के बारे में जानकारी दी। बताया कि लाल भिंडी आजाद कृष्णा सीएसए में विकसित की गई है। यह खाने में अधिक स्वादिष्ट और कुरकुरी होती है। साथ ही इसमें सामान्य भिंडी वाले कीट नहीं लगते। बारामासी करेला किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। इसमें अधिक तापमान, अधिक पानी झेलने की क्षमता होती है। इसके अलावा जमुनिया आलू को भी यहां के मौसम के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें शुगर की मात्रा कम होती है। कुफरी की प्रजाति को यहां के मौसम के हिसाब से तैयार किया है।
फूल की पंखुड़ी की तरह तैयार किया मशरूम
प्लांट पैथोलॉजी में पीएचडी कर रहे लवी हैदर ने मशरूम की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने भूसे का आधार बनाकर उस पर मशरूम तैयार किया। यह फूल की बड़ी पंखुड़ियों की तरह निकलता है। खास बात है कि इसे किसी भी मौसम में तैयार कर सकते हैं। कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा बटन मशरूम और ड्राई मशरूम के बारे में भी जानकारी दी।
काला नमक चावल में ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55, बिना परहेज खा सकते मधुमेह रोगी
इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट बनारस से आए एसोसिएट वैज्ञानिक विवेक कुमार ने मधुमेह के रोगियों के लिए इस्तेमाल होने वाले चावल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चावलों की अधिकतर प्रजाति में ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70-92 के बीच होता है। जिसे मधुमेह रोगियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक नहीं माना जाता है। कारण अधिक जीआई वाले पदार्थों से ब्लड शुगर लेवल तुरंत बढ़ता है। इस कारण ही मधुमेह रोगियों को चावल खाने से परहेज कराया जाता है। वजन कम कर रहे लोग भी चावल से दूरी बना लेते हैं लेकिन काला नमक और डीआरआर 81 प्रजाति के चावल में जीआई 55 है। इस कारण मधुमेह के रोगी इसे बिना किसी परहेज के खा सकते हैं।
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बिना खाद व मिट्टी पाइप में तैयार हो रही फसल
फ्रूट साइंस में पीएचडी कर रहे अभिनव वाजपेयी ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में खाद और मिट्टी की आवश्यकता नहीं है। इसमें पालक, स्ट्राबेरी, गोभी, पत्तागोभी, सलाद पत्ते को आसानी से उगाया जा सकता है। बताया कि पानी में ही सारे पोषक तत्व डाले जाते हैं, वह ही पाइप से बराबर पौधों तक पहुंचकर उनको बड़ा करता है। जैसे फसल के लिए जमीन कम होती जा रही है आने वाले समय में यह तकनीक काफी कारगर होगी।