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Kanpur News: बैंक ऑफ इंडिया के मुख्यालय पहुंचा ओडीओपी में गड़बड़ी का मामला

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कानपुर। बैंक ऑफ इंडिया की दादानगर शाखा समेत अन्य शाखाओं में एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) की सब्सिडी में गोलमाल का खुलासा होने के बाद अब पूरा मामला मुंबई स्थित बैंक के मुख्यालय को भेज दिया गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद दोषी अफसरों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। घोटाले की रकम अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट न होने से संभावना है कि आर्थिक अपराध शाखा या सीबीआई से भी जांच कराई जा सकती है।
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उद्योग विभाग भी पूरे मामले में सख्त हो गया है। उद्योग निदेशक ने सोमवार को कानपुर समेत प्रदेश भर के उपायुक्त उद्योगों से वित्तीय वर्ष 2022-23 में भेजी गई सब्सिडी का ब्योरा सात दिन में देने के लिए कहा है। निर्देश में ये भी कहा गया है कि बिना संयुक्त सर्वे और भौतिक सत्यापन के औद्योगिक इकाइयों को सब्सिडी जारी नहीं की जाएगी। बैंक के महाप्रबंधक की ओर से कराए गए ऑडिट में गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। पहले ऑडिट में कोई गड़बड़ी ही नहीं मिली। वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 के इन मामलों में करोड़ों का हेरफेर किया गया। अधिकतर मामले कानपुर देहात की इकाइयों के हैं। वहां पर एक जिला एक उत्पाद योजना में प्लास्टिक उत्पाद शामिल हैं।
बैंक और विभाग के संयुक्त भौतिक सत्यापन के बाद ही मार्जिन मनी यानी सब्सिडी का भुगतान संबंधित इकाइयों को होता है। बैंक की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया था कि दादानगर समेत अन्य शाखाओं में तमाम खातों के जरिये करीब 9-10 करोड़ रुपये की सब्सिडी ली गई। इन रुपयों का इस्तेमाल उद्योग लगाने में नहीं किया गया। नियमों को भी ताक पर रख दिया गया। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में बैंक ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से फ्रॉड किया और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में सेंधमारी का रास्ता निकाल लिया।
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हैरानी की बात ये है कि बैंक के सालाना ऑडिट में यह मामला वर्ष 2023 में ही पकड़ में आ गया था। यह दूसरी ऑडिट रिपोर्ट थी जिसकी शिकायत तत्कालीन ऑडिटर व बैंक के सीनियर मैनेजर ने की थी। इसके बाद से इस रिपोर्ट पर तत्कालीन कानपुर के जोनल मैनेजर और उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए सिर्फ कुछ अधिकारियों का ट्रांसफर कर मामले को दबा दिया। दादानगर शाखा में कार्यरत लगभग सभी अधिकारी अपना तीन वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा करने वाले थे।
दादानगर शाखा के मैनेजर को कानपुर जोन में निर्धारित समय पूर्ण होने के कारण गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला सिर्फ दादानगर शाखा तक सीमित नहीं था। दादानगर के मैनेजर ने ही कौशलपुरी, मंधना, सीसामऊ, गुरु तेग बहादुर शाखा के अफसरों को इसी तरह के फ्रॉड में शामिल किया था। उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि बैंक और उद्योग विभाग के संयुक्त सर्वे और भौतिक सत्यापन के बाद ही पात्र इकाइयों को मार्जिन मनी यानी कि सब्सिडी भेजी जाएगी।
बैंक ऑफ इंडिया की दादानगर शाखा में एक ही परिवार या समूह से जुड़े कई प्रतिष्ठानों ने फिक्स डिपाजिट (एफडी) का उपयोग करके बार-बार ओडीओपी का ऋण लेने के साथ ही सब्सिडी हासिल करते रहे। ओडीओपी के बाद पांच करोड़ रुपये के ऋण में 20 लाख रुपये की सब्सिडी का दावा किया गया। जैसे ही सब्सिडी की राशि खाते में आई, उसे तुरंत अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। फिर उसी ऋण की राशि और कुछ अतिरिक्त धन जोड़कर परिवार के दूसरे सदस्य या संबंधित फर्म के नाम से दो करोड़ की नई एफडी बनाकर ऋण, वही ब्याज रियायत और दोबारा 20 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ लिया गया। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रक्रिया कम से कम 11 बार दोहराई गई जिससे कुल 2.20 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी हड़पी गई। अब अन्य शाखाओं समेत 15 से ज्यादा कर्मचारी और अफसर फंस गए हैं। इसी तरह के मामले अन्य शाखाओं में भी हुए हैं। करीब 10 करोड़ के करीब गड़बड़ी की गई है।
पूरे मामले की जानकारी मुंबई स्थित मुख्यालय को भेज दी गई है। जो भी कर्मचारी और अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा। सभी मामलों की जांच शुरू करा दी गई है। उद्योग विभाग के अफसरों ने भी मामले में अनदेखी की है।
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-अमरेंद्र कुमार, महाप्रबंधक, बैंक आफ इंडिया, उत्तर प्रदेश।

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