कानपुर। शहर की कई महिलाओं के स्टार्टअप कमाल कर रहे हैं। इन्होंने अपने हुनर और शौक को कारोबार का रूप देकर अपनी अलग पहचान बनाई। अब इनके उत्पाद देश-विदेश में धाक जमाए हैं। इनके उत्पादों में त्योहारों पर साज-सज्जा वाले सामान से लेकर प्राकृतिक चिकित्सा में काम आने वाली वस्तुएं हैं।
शहर की कई महिलाएं बड़े पैमाने पर डिजाइनर राखियां, मोतियों और गोटे से सजे बंदनवार (तोरण), शुभ-लाभ के हैंगिंग आइटम्स, कान्हा के लिए मनमोहक पोशाकें और झूले बना रही हैं। सावन और त्योहारों के सीजन में उनके उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ी है। बड़ी खासियत इनकी फिनिशिंग और अनूठा डिजाइन है, जो बाजार में मिलने वाले रेडीमेड सामानों से बिल्कुल अलग है।
कुछ महिलाओं ने एरोमा थेरेपी और ऑर्गेनिक स्किनकेयर के क्षेत्र में कदम रखा है। आवश्यक तेलों, सुगंधित हर्बल मोमबत्तियों और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बने साबुनों का निर्माण कर वे लोगों को केमिकल-मुक्त जीवनशैली का विकल्प दे रही हैं। तनाव से मुक्ति और मानसिक शांति के लिए एरोमा थेरेपी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने इन महिलाओं के पंखों को नई उड़ान दी है। इनके उत्पाद कानपुर या उत्तर प्रदेश तक ही नहीं, दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी धूम मचाए हैं। उत्पादों को कूरियर के जरिये बाहर भेजा जाता है।
गृह उद्योगों से अन्य महिलाओं को जोड़ा
इनके गृह उद्योगों ने अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार देना शुरू कर दिया है। पैकिंग, क्राफ्टिंग और सिलाई जैसे कामों के लिए ये उद्यमी महिलाएं दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को जोड़ रही हैं, जिससे महिला सशक्तीकरण को जमीनी स्तर पर बढ़ावा मिल रहा है।
इंदु दे रहीं कॉलेज की छात्राओं को भी काम
मनीराम बगिया निवासी इंदु माहेश्वरी बंदनवार, राखी और सजावटी सामान बनाती हैं। इंदु ने बताया कि कॉलेज जाने वाली जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को रोजगार दिया, ताकि पढ़ाई के साथ चार पैसे भी कमा सकें। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर चुकीं इंदु पहले पेंटिंग सिखाती थीं। अब उनका कारोबार चल निकला है।
कशिश बना रहीं स्किन केयर के प्राकृतिक उत्पाद
तिलकनगर निवासी कशिश 2021 से प्राकृतिक स्किन केयर उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्होंने चार लोगों को रोजगार दे रखा है। कशिश ने बताया कि उनकी स्किन बहुत सेंसिटिव थी और कोई भी प्रोडक्ट उन्हें जल्दी सूट नहीं करता था। ऐसे में उन्होंने खुद के लिए ही घरेलू तरीकों से साबुन, तेल, मसाज क्रीम, लोशन आदि तैयार किया। आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक उनके उत्पादों की मांग है।
सुमन की आर्टिफिशियल ज्वैलरी भी लुभा रही
स्वरूपनगर निवासी सुमन ने 2003 में आर्टिफिशियल ज्वैलरी का काम शुरू किया। उन्होंने छह लड़कियों को रोजगार दिया है जो उनके साथ आर्टिफिशियल ज्वैलरी, भगवान की पोशाक, उनके जेवर आदि तैयार करती हैं। उनके उत्पाद विदेशों तक जाते हैं। सबसे ज्यादा मांग ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आती है।
शांभवी का एसेंशियल ऑयल देता है सुकून
अस्सी फिट रोड निवासी शांभवी तिवारी साइकोलॉजिस्ट हैं। वे हीलिंग थेरेपी करती हैं। उनके क्रिस्टल खूब बिक रहे हैं। शांभवी 2022 से एरोमा थेरेपी के लिए एसेंशियल ऑयल, क्रिस्टल, धूपबत्ती आदि बना रही हैं। वे ऑनलाइन काउंसलिंग भी करती हैं। विदेश में भी उनके सत्र होते हैं। इसी से विदेशों में भी उनके उत्पाद खूब बिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि एरोमा थेरेपी व एसेंशियल ऑयल मानसिक सुकून और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। फ्लोरल धूपबत्ती वातावरण को सकारात्मक बनाती है।