कानपुर। सर्जन डॉ. संदीप जिन्होंने अपने 16 साल के कॅरिअर में न जाने कितने मरीजों की तकलीफ मिटाई होगी लेकिन उनके अपने जीवन में भी दर्द कुछ कम नहीं था। सर्जन ने 2010 से अपना कॅरिअर शुरू किया। कुछ समय के बाद से मानो दर्द ने भी उनका दामन थाम लिया। एक भाई विशाल की बीमारी से मौत के बाद दूसरे भाई राहुल की 2016 में नोएडा में हुए सड़क हादसे में जान चली गई। डॉ. संदीप के जीवन की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं।
पहली पत्नी डॉ. कीर्ति से लगातार मनमुटाव बढ़ता गया। फिर नौबत यह आ गई कि 2018 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। तलाक के साथ ही संदीप को 12 साल के बेटे अरनव से भी जुदाई का दंश झेलना पड़ा। कीर्ति के फैसले से संदीप इस कदर नाराज थे कि उन्होंने पूरे परिवार से कह रखा था कि अब कोई उससे मतलब नहीं रखेगा।
यही वजह है कि आज कीर्ति और अरनव कहां है किसी को कुछ नहीं पता। परिजन के मुताबिक 2020 में कासगंज की कंचन से संदीप ने प्रेम विवाह किया। उनकी जिंदगी में चार साल की बेटी माही और दो माह का बेटा वंशीधर आया। कंचन की भी दूसरी शादी थी। कानपुर देहात के अस्पताल के साथियों का कहना है कि संदीप स्वभाव के सरल थे लेकिन अक्सर डिप्रेशन में रहते थे। ऐसा लगता था कि उनके साथ कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मगर वो अपनी जान ले लेंगे ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। छोटे भाई विक्रम ने बताया कि रविवार रात किसी न किसी गंभीर बात पर दोनों में विवाद जरूर हुआ होगा। इसके बाद चप्पल वाली बात हो गई होगी जिससे नौबत आत्महत्या तक पहुंच गई।
पिता ने कहा, कंचन से संदीप बोला था ज्यादा धर्मात्मा बनती हो
सर्जन संदीप के पिता भी सूचना पाकर निरालानगर स्थित अपार्टमेंट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कंचन कुछ ज्यादा ही धार्मिक प्रवृत्ति की है। वह घर पर पूजा पाठ अधिक करती थी। शायद यही वजह थी कि दोनों सात-आठ साल पहले परदेवनपुरवा का घर छोड़कर निरालानगर में ग्राउंड फ्लोर पर स्थित थ्री बीएचके फ्लैट में रहने लगे थे। घटना के बाद बहू ने ही फोन कर उन्हें बताया था कि संदीप ने उससे से कहा था कि तुम ज्यादा धर्मात्मा बनती हो तो लो... इतना ही बता पाई थी कि फोन कट गया था। वहीं, अपार्टमेंट के लोगों ने बताया कि दो माह पहले जब संदीप के बेटे का जन्म हुआ था तो उन्होंने खुशी में मिठाई बांटी थी। ऐसा नहीं लग रहा था कि इतनी जल्दी परिवार बिखर जाएगा।
कानपुर और कन्नौज में रह चुकी तैनाती
संदीप के चचेरे भाई ऋषभ ने बताया कि उन्होंने देहरादून से वर्ष 2006 में जॉली ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया था। वर्ष 2010 में कानपुर मेडिकल कॉलेज से एमएस करने के बाद करीब नौ साल तक हैलट में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद उनका तबादला कन्नौज हुआ जहां डॉ. संदीप छह साल तक कार्यरत रहे। करीब दो साल पहले ही उनका तबादला कानपुर देहात में हुआ था।