इटावा। नाले में बही सात साल की मासूम की तलाश करने में नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों के हाथ पैर फूल गए। रात लगभग 10 बजे टीमें सुबह तलाश करने की बात कहकर निकल गईं जबकि मासूम के परिवार व मोहल्ले के लोग रातभर उसकी तलाश में जुटे रहे। हादसे के करीब 26 घंटे बीतने के बाद भी शुक्रवार शाम तक मासूम का कुछ पता नहीं चला। जगह-जगह नाले से कूड़े ढेर जरूर निकलते रहे जो कि पालिका की सफाई की पोल खोल रहे थे। अतिक्रमण की वजह से संकरे नालों में बोट उतारने से एसडीआरएफ की टीम ने भी हाथ खड़े कर दिए।
कोतवाली क्षेत्र के मेवाती टोला निवासी अनम (7) पुत्री मुस्तफा गुरुवार शाम बारिश के दौरान घर के बाहर बच्चों के साथ खेल रही थी। तभीपैर फिसलने से वह खुले नाले में जा गिरी और तेज बहाव में बह गई। जानकारी पर एसडीएम सदर विक्रम राघव, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक यशवंत सिंह, ईओ संतोष मिश्रा टीम के साथ पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू कराई थी। रात लगभग 10 बजे पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने आवास चले गए।
उनके जाते ही नगर पालिका के कर्मचारियों भी सुबह अभियान चलाने की बात कहकर चलते बने। इसके बाद परिजन और मोहल्ले वालों ही रात भर अनम को नाले में तलाशते रहे। बीच सिर्फ कूड़े के ढेर ही उनके हाथ लगे। शुक्रवार सुबह से दोबारा तलाश शुरू की गई लेकिन मासूम का कुछ पता नहीं लगा। एसडीआरएफ की टीम भी कूड़े के ढेर और नाला संकरा होने की वजह से नहीं उतर सकी।
बेटी के न मिलने से परेशान पिता मुस्तफा ने कहा कि रात लगभग 10 बजे ही टीमें सुबह तलाशने की बात कहकर चली गई थीं। हमारा परिवार और पड़ोसियों ने पूरी रात तलाश लेकिन सिर्फ कूड़े के ढेर मिले। यदि नालों की सफाई हकीकत में कराई गई होती तो शायद बच्ची मिल जाती और उसकी जान बच जाती।
नाले में गंदगी इतनी अधिक है कि हमारी बोट उतारी नहीं जा सकी। अगर बच्ची बहाव में कहीं फंसी है तो तलाश में और समय लगेगा।
- जावेद अहमद, एसडीएफ प्रभारी