इकदिल। भैंस चराने गई बालिका श्मशान घाट के पास पड़ी जंगल के गड्ढे में भरे पानी में डूब गई। काफी देर तक न लौटने पर परिजनों ने तलाश की। करीब चार घंटे बाद किशोरी का शव आठ फीट गहरे गड्ढे से निकाल सके।
जयवीर सिंह निवासी गांव मुरैथा के डेरा बंजारा शहजादपुर मजरा मजदूरी करते हैं। उनकी बेटी सुप्रिया (12) मंगलवार दोपहर गांव के बाहर श्मशान घाट के पास जंगल भैंस चराने गई थी। इस बीच आठ फीट गहरे गड्ढे में भरे पानी में गिर पड़ी। उसकी एक चप्पल और हाथ का डंडा गड्ढे के बाहर ही पड़े थे।
गांव की ही एक बुजुर्ग महिला ने सुप्रिया की चप्पल और डंडा देखकर उसकी आसपास तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका। इस पर बुजुर्ग महिला ने गांव में जाकर सुप्रिया के परिजनों को सूचना दी। जानकारी पर सुप्रिया के पिता जयवीर गांव के अन्य लोगों के साथ तलाश करने गए। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद सुप्रिया का शव गड्ढे में पड़ा मिला।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने गड्ढे से शव को निकलवाकर जांच की। जयवीर सिंह ने बताया बेटी भैंस चराने गई थी। तभी गड्ढे में गिरने से उसकी मौत हो गई। वह दो भाइयों और चार बहनों में घर की सब से छोटी बेटी थी। वह कक्षा पांच की छात्रा थी। किशोरी की मौत के बाद दो भाई नीरज, धीरज और बहन वंदना, अर्चना, रंजना के साथ मां शीला देवी का रोकर बुरा हाल है। बीडीओ विजय शंकर ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। यदि शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
पिता जयवीर सिंह ने बताया कि जानकारी मिली है कि कुछ दिन पहले प्रधान ने श्मशान में मिट्टी पड़वाने के लिए गड्ढ़ा खुदवाया था। उसमें बारिश का पानी भरने से हादसा हो गया। मेरी मासूम बच्ची की जान चली गई। मेरी बेटी की जान लापरवाही की वजह से गई है।
प्रधान मीना देवी ने बताया कि गड्ढ़ा होने के बाद तार की फेसिंग कराई गई थी। किसी ने तार काटकर चोरी कर लिए हैं। फिर से फेसिंग कराई जाएगी। साथ ही गड्ढ़े को भी भरवाया जाएगा।