तीनों अधिकाजरियों ने गांव जाकर जांच की तो पता चला कि 463 शौचालय का निर्माण दिखाकर पैसा निकाला गया। स्थलीय सत्यापन में 137 शौचालय सिर्फ कागजों में ही बना दिए गए। मौके पर शौचालय नहीं मिले। 10 लाभार्थियों ने स्वयं की धनराशि से शौचालय का निर्माण कराया। पांच शौचालय अपूर्ण पाए गए।
इसमें सीट नहीं लगी थी और गड्ढा भी निर्मित नहीं था। जांच टीम ने पूर्व प्रधान व तत्कालीन सचिव को 16.75 लाख का गबन करने का दोषी मानते हुए रिपोर्ट बीडीओ को सौंपी। बीडीओ ने मामले की जानकारी सीडीओ को दी। सीडीओ के निर्देश पर डीपीआरओ ने पूर्व प्रधान व सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी की।
पूर्व प्रधान व सचिव को जारी की गई नोटिस
डॉ. निरीश चंद्र साहू, डीपीआरओ ने बताया कि मामले में शौचालय के नाम पर लाखों का गबन मिला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रधान व सचिव को नोटिस जारी की गई है। सात दिन में जवाब मांगा गया है। समय से संतोषजनक जवाब न मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
अन्य ग्राम पंचायतों में भी हो चुके हैं घोटाले
- हसनगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत पमेधिया में पंचायत भवन को कागजों पर पूरा दिखाकर 16.61 लाख रुपये निकाल लिए गए। मामले की जब जांच हुई तो पता चला कि पंचायत भवन अभी बना ही नहीं है। डीपीआरओ ने प्रधान व सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगा।