पॉलीटेक्निक के पांच स्टूडेंट्स को एक साल के लिए कॉलेज और हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। विकास नगर में व्यापारियों से मारपीट की जांच कर रही पॉलीटेक्निक की प्रॉक्टोरियल बोर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर शुक्रवार को यह कार्रवाई की गई है।
इन स्टूडेंट्स के पचास फीसदी मार्क्स भी काट लिए गए हैं और कैंपस में घुसने पर पाबंदी लगा दी गई है। निष्कासन की अवधि में यदि ये छात्र कैंपस में दाखिल होते हैं तो इन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
पिछले दिनों विकास नगर में व्यापारियों से मारपीट के बाद पालीटेक्निक के अज्ञात स्टूडेंट के खिलाफ नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।
बाद में सोहन लाल, सुशांत विश्वकर्मा, नवीन कुमार, आदर्श सिंह और विमलेश कुमार को नामजद किया गया। ये मेकेनिकल, केमिकल, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन के छात्र हैं।
प्रैक्टिकल एग्जाम के दौरान ही इन आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई। प्रिंसिपल एफआर खान ने इस मामले की जांच प्रॉक्टोरियल बोर्ड को दी थी।
प्रमथेस सहाय, अनूप पटेल, एके मिश्रा और सीके उपाध्याय की अगुवाई वाली कमेटी ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट प्रिंसिपल को दे दी है।
प्रिंसिपल ने कहा कि जांच में सोहन लाल, सुशांत विश्वकर्मा, नवीन कुमार, आदर्श सिंह और विमलेश कुमार को अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया है। इन सबके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है।
इसलिए सोहन लाल, सुशांत, नवीन, आदर्श और विमलेश को शुक्रवार को ही संस्थान से एक साल यानी दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया है। ये सभी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते थे।
इसलिए हॉस्टल के कमरों में ताला डलवा दिया गया है। अनुशासनहीनता पर प्रिंसिपल की सख्ती का असर राजकीय पॉलीटेक्निक में दिखा है। इससे पहले रैगिंग के आरोप में छह स्टूडेंट संस्थान से निष्कासित किए जा चुके हैं।
छात्रा से अभद्रता में एक स्टूडेेंट को निष्कासित किया गया है। अब अनुशासन तोड़ने वाले स्टूडेंट सहमे हैं।