कानपुर। रविवार को चंद्रग्रहण का असर शहर के धार्मिक स्थलों पर भी दिखा। परंपरा के अनुसार सूतक काल लगते ही शहर के प्रमुख मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोपहर 12 बजे के बाद ही बंद कर दिए गए। अब कपाट सोमवार सुबह पांच बजे मंगला आरती के बाद खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिर में शुद्धिकरण और विशेष पूजा होगी।
धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहण अशुद्ध समय माना जाता है। इसी वजह से मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन रोक दिए जाते हैं। इस दौरान केवल जप, ध्यान और पाठ को ही शुभ माना जाता है। रविवार देर रात आकाश में अद्भुत खगोलीय घटना देखने को मिली। रात 9:57 बजे शुरू हुआ पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब तीन घंटे 28 मिनट चला और देर रात 1:26 बजे समाप्त हुआ। रात 11:41 बजे ग्रहण का शिखर समय रहा जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक गया और गहरी लालिमा से नहा गया। इस कारण इसे ब्लड मून भी कहा गया। पूर्ण अवस्था में चंद्रमा नारंगी-लाल रंग का दिखाई दिया। यह दृश्य पूरे कानपुर में स्पष्ट देखा गया।
शहरों और कस्बों में लोग छतों व खुले मैदानों में रात तक जुटे रहे। खगोल विज्ञान संस्थानों और क्लबों ने दूरबीन से लाइव दर्शन कराए गए। सोशल मीडिया पर ब्लड मून की तस्वीरें और वीडियो खूब साझा हुए। ग्रहण से पूर्व दोपहर 12:57 बजे से ही सूतक काल लग गया था। इस दौरान भोजन, पूजा और शुभ कार्य वर्जित रहे। ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं ने स्नान और दान-पुण्य किया। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में आचार्य पुजारी पहले गंगाजल और मंत्रोच्चारण से शुद्धिकरण करेगे। इसके बाद आरती और विशेष पूजा होगी।