कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की सख्ती के बाद भी जिले के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़ हो गए हैं। सितंबर महीने में अफसरों की लापरवाही और 50 फीसदी पीड़ितों को निराश करने के कारण जिला आईजीआरएस रैकिंग में आखिरी पायदान से सिर्फ दो कदम पीछे है। रैंकिंग में जिला 73वें स्थान पर पहुंच गया। अगस्त महीने में जिले को 70वीं रैंक हासिल हुई थी।
आईजीआरएस रैंकिंग में जिले का प्रदर्शन लगातार खराब होता जा रहा है। प्रत्येक महीने जारी होने वाली रैंकिंग के बाद जिलाधिकारी अफसरों के साथ बैठक कर शिकायतों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने का पाठ पढ़ाते हैं। इसके बाद भी अफसरों ने जनता की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया। सितंबर महीने में जिले को 140 में 110 अंक हासिल हुए। यानी 78.57 फीसदी अंक के साथ 73वीं रैंक मिली। इसका कारण विभाग के ज्यादातर अफसरों ने जनता की समस्याओं को मौके पर जाकर निस्तारण नहीं करना रहा।
सीएम कार्यालय से सितंबर महीने में जिले में आईं 10287 शिकायतों का फीडबैक लिया गया। इनमें 5135 लोगों ने अफसरों पर नाराजगी जताई। 5152 लोग संतुष्ट मिले। यानी 50 फीसदी लोगों की ही समस्या का निस्तारण हो सका। इससे साफ जाहिर होता कि अफसरों ने आधी से ज्यादा शिकायतें कार्यालय में बैठकर ही निपटा दीं। हालांकि अगस्त माह की बात करें तो जिला 70वें स्थान पर था। इस माह भी 11255 में 5939 फरियादी असंतुष्ट मिले थे।