कानपुर। आईआईटी में लगातार हो रही आत्महत्या के बाद संस्थान जागा है। संस्थान अब छात्रों के मन की बात जानने के लिए छात्रों से व टू वन बात करेगा। संस्थान में स्थापित सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबींग के काउंसलर्स अब 24 घंटे काम करेंगे। छात्रों के मन की स्थिति को जानने के लिए उनसे बात करेंगे। न केवल छात्र बल्कि फैकल्टी और स्टाफ के तनाव को भी कम करने का काम सेंटर करेगा।
संस्थान में लगातार हो रही आत्महत्याओं को रोकने, छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ की मानसिक मजबूती के अब आईआईटी ठोस कदम उठा रहा है। पिछले दो सालाें में आठ छात्रों, शोध फैकल्टी सदस्य, स्टाफ की आत्महत्या ने सभी को झकझोर दिया है। निदेशक ने सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबींग स्टेबलिश सेंटर की स्थापना की थी। अब सेंटर के काउंसलर हॉस्टल, प्रयोगशाला, कक्षाएं, लाइब्रेरी आदि में भ्रमण कर छात्रों से संपर्क करेंगे। काउंसलिंग सेल को और अधिक मजबूत करते हुए मनोचिकित्सक और काउंसलर की संख्या में इजाफा किया गया है।
निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद तय हुआ कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कार्यशालाएं, जागरूकता कार्यक्रम स्टूडेंट कनेक्ट प्रोग्राम की संख्या में वृद्धि की जाए। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम सिर्फ सेंटर तक सीमित न रहे बल्कि संस्थान के हर उस स्थान तक पहुंचे जहां छात्रों का जुड़ाव रहता है। आईआईटी से लगभग पिछले 20 वर्षों से जुड़े मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई के मुताबिक, अब टीम अगले छह माह से लेकर एक साल के अंदर तक सभी छात्रों तक पहुंचेगी और उनकी हर परेशानी को समझने के साथ एक डाटा तैयार करेगी। काउंसलिंग कराई जाएगी। छात्रों से फीडबैक भी लिया जाएगा। डाटा होने से छात्रों को चिह्नित करना आसान होगा। अभी तक संस्थान के छात्र खुद काउंसलिंग के लिए आते थे। अब विशेषज्ञ उनके पास पहुंचेंगे।