मेडिकल काॅलेज में जानकारी देते विभागाध्यक्ष डा. सीमा द्विवेदी, डा. एके आर्या,डा. यशवंत राव
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कानपुर। दो माह तक के नवजातों के शरीर का तापमान, धड़कन और पल्स रेट अब एक छोटी चिप से पता चल जाएगा। मेडिकल कॉलेज ने आईआईटी के स्टार्टअप मेडेंट्रिक से समझौता किया है। स्टार्टअप इस चिप को बनाना शुरू कर चुका है। इसे नेओहेल्थ नाम दिया गया है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में बच्चों के हाथ की कलाई या सीने पर 24 घंटे के लिए चिप लगाई जाएगी। इससे बच्चों का तापमान, सांस की गति, कराहना, पल्स रेट और एसपीओटू की जानकारी होगी। इससे उन्हें गंभीर बीमारियां होने से पहले ही बचाया जा सकेगा। चिप के लिए सात लाख रुपये का बजट भी आवंटित हो चुका है। बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राव ने बताया कि चिप से बच्चों में पॉसिबल सीरियस बैक्टीरियल इन्फेक्शन (पीएसबीआई) के बारे में पहले से पता लगेगा।
उन्होंने बताया कि सौ में से दस नवजातों में यह समस्या होती है। 80 प्रतिशत मामलों में अभिभावकों को पता नहीं लगता और बच्चे की हालत अधिक गंभीर हो जाती है। पीएसबीआई में बच्चे की सांस तेज चलती है, तेज बुखार या शरीर ठंडा पड़ जाता है। बच्चा दूध कम पीता है और सुस्त हो जाता है। ऐसे में चिप की मदद से बच्चे की पूरी जानकारी हमारे पास उपलब्ध होगी और हम उसे सही इलाज दे पाएंगे। डॉ. यशवंत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने सात लाख स्वीकृति किए हैं। जल्द ही यह बाजार में आएगी। विभागाध्यक्ष डॉ. एक आर्या ने बताया कि चिप को बच्चे के शरीर पर 24 घंटे के लिए चिपकाया जाएगा। नहाते समय उसे हटा भी सकते हैं और बाद में चिपका सकते हैं।
डॉ. यशवंत ने बताया कि बाजार में आने के बाद लोग इसे खरीद सकते हैं और घर पर भी इसे आसानी से बच्चों पर लगा सकते हैं। चिप खरीदते समय अभिभावक को नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज कराना होगा। बच्चे के शरीर पर चिपकाते ही बच्चे के तापमान समेत अन्य जानकारी बाल विभाग के पास आ जाएगी। अगर स्थिति गंभीर होने वाली लगेगी तो फोन कर तुरंत बच्चे को भर्ती कराने की जानकारी अस्पताल से देंगे।