कानपुर। दो महीने की उम्र तक के शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के लिए मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें माता-पिता के फोन पर कंप्यूटरीकृत मैसेज भेजा जाएगा।
इसमें बच्चे की स्थिति के संबंध में प्रश्न पूछे जाएंगे। इनका जवाब हां या न में देना रहेगा। बच्चे को दिक्कत होने पर उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बालरोग विभाग के विशेषज्ञ इस संबंध में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
मंगलवार को इस संबंध में सीडीओ और सीएमओ के साथ बैठक हुई है। सबसे पहले इस व्यवस्था को गजनेर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े गांवों में लागू किया जाएगा।
यहां पर कार्यक्रम सफल होने के बाद अन्य स्थानों पर लागू किया जाएगा। फोन पर सबसे पहले मैसेज आए कि बच्चे की सांस ठीक चल रही है? इसके बाद बच्चे के शरीर के तापमान के संबंध में जानकारी ली जाएगी।
बुखार होने पर बच्चे को सीएचसी तक पहुंचाने में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहयोग करेंगे। यह व्यवस्था अमेरिकन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स के सहयोग से लागू की जा रही है। प्रोजेक्ट बाल मृत्यु दर न्यूनतम करने के लिए शुरू किया गया है।