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बाल रोग में इंजेक्शन से बच्चे की मौत

Sun, 11 Jan 2015 02:39 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में शनिवार सुबह इंजेक्शन लगाने पर नौ माह के बच्चे राज की मौत हो गई। परिजनों ने नर्सिंग स्टूडेंट पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाकर हंगामा किया।
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परिजनों के हंगामे के बाद डॉ. एके आर्या पहुंचे और उन्हें समझाया। परिजन नर्सिंग स्टूडेंट को बुलाने की मांग करने लगे। इस पर डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम कराने के लिए कहा। लेकिन परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव लेकर चले गए।

शुक्लागंज निवासी उमेश के बेटे राज गौतम को ठंड लगने के बाद 25 दिसंबर को बाल रोग अस्पताल की इमरजेंसी में डॉ. एके आर्या की यूनिट में भर्ती कराया था।

कुछ दिन इलाज के बाद राज ठीक हो गया। इस बीच बच्चे को हल्की दिक्कत होने लगी तो डॉक्टर ने कुछ दिन और भर्ती रहने की सलाह दी। उमेश ने बताया कि इधर तीन दिन से बेटा बिल्कुल ठीक था और दूध भी पीने लगा था।
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शनिवार सुबह डॉ. एके आर्या ने राउंड लिया तो बेटे को पूरी तरह ठीक बताया और एक-दो दिन में डिस्चार्ज करने की बात कही। सुबह 11:30 बजे दो नर्सिंग स्टूडेंट्स और एक लड़का आया। उन्होंने बेटे को इंजेक्शन लगाने के लिए सीरिंज मंगवाई और दवा भरने लगे।

उमेश का कहना कि सीरिंज में दवा ज्यादा भरी देखी तो मना किया लेकिन इंजेक्शन लगाने वाली नर्सिंग स्टूडेंट ने नहीं सुना। इंजेक्शन लगाने के दौरान वह आपस मेें बात करते रहे। इधर, इंजेक्शन लगते ही बेटे ने तड़पना शुरू कर दिया।

यह देख उसने इंजेक्शन लगाने के लिए मना किया, पर नर्सिंग स्टूडेंट ने उसकी एक न सुनी। जैसे ही इंजेक्शन लगाकर सिरिंज निकाली बेटा शांत हो गया। शोर मचाया तो जूनियर डॉक्टरों ने उसे देखा और मृत घोषित कर दिया।


बच्चे की हालत गंभीर थी

इलाज करने वाले डॉ. एके आर्या ने बताया कि जब बच्चे को भर्ती कराया गया तो वह सीवियर सेप्टीसमिया और सीवियर निमोनिया से पीड़ित था। इलाज चल रहा था। शनिवार सुबह उसे एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाया गया था।

इस इंजेक्शन से मौत होने का आरोप गलत है। हो सकता है कि बच्चे को झटका आया हो और उसने दम तोड़ दिया हो।

सभी दवाएं बाहर से मंगाईं

उमेश ने बताया कि 25 दिसंबर से अब तक उससे सभी दवाएं बाहर से मंगाई गईं। यहां तक कि सिरिंज, ग्लब्स और रूई भी बाहर से मंगाई जाती रही। महंगे इंजेक्शन यह कहकर मंगाए जाते थे कि अस्पताल में ऐसी दवाएं नहीं मिलती हैं।

अब तक उसके 25 हजार रुपये खर्च हो चुके थे। लेकिन खुद आराम के चक्कर में डॉक्टरों ने उसके बच्चे की जान ले ली।

सांस की नली में गया था दूध

एसआईसी डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि उन्हें सीनियर रेजीडेंट ने बताया है कि बच्चे को बिस्तर पर लिटाकर दूध पिलाया गया था। इससे दूध बच्चे के सांस की नली में चला गया था। इस कारण उसकी मौत हो गई।
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इंजेक्शन से मौत तब होती है जब गलत इंजेक्शन हो। बच्चे को पहले से ही वह एंटीबायोटिक इंजेक्शन लग रहा था।
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