यदि आपने किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट में घर खरीदा है या खरीदने की तैयारी में हैं तो अपने अधिकार भी जान लें। आपको पता होना चाहिए कि किसी भी प्रोजेक्ट के नक्शे में बिना आवंटी की इजाजत के कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। यूपी अपार्टमेंट एक्ट के नियम-4 के मुताबिक बिल्डर को पूर्व स्वीकृत नक्शे में परिवर्तन से पहले प्रत्येक आवंटी से सहमति लेनी होगी।
ऐसा न करके बिल्डर सामुदायिक सुविधाओं वाली जगहों पर परचेजेबल एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की आड़ में अतिरिक्त निर्माण कराकर अपनी जेब मोटी करते हैं। अधिकारों के प्रति आवंटियों को जागरूक होना होगा। तभी बिल्डरों की धोखाधड़ी का खेल रुकेगा।
फ्लैट खरीदने पहुंचो तो बिल्डर प्रोजेक्ट के चार टावरों के बीच घर के सामने ग्रीन एरिया, बेसमेंट में पार्किंग, क्लब, पूल आदि सुविधाएं देने की बात करते हैं। ब्रोशर में भी इन सुविधाओं का जिक्र होता है। कुछ समय बाद जब फ्लैट खरीदार पजेशन लेना जाता है तो देखता है कि ग्रीन एरिया की जगह पर नया टावर बना है। उस टावर में रहने वाले लोग भी उन सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जो चार टावर में रहने वालों के लिए थी।
केडीए से स्वीकृत फाइनल नक्शा जरूर देखें
आरडब्ल्यूए फेडरेशन के सक्रिय सदस्य विपुल रहेजा ने बताया कि बिल्डर पहले चरण की एफएआर को दिखाकर लोगों को फ्लैट बेचते हैं। ब्रोशर में जो जगह सामुदायिक सुविधाओं की थी, वहां परचेजेबल एफएआर के कारण कुछ और ही निर्माण हो जाता है। 10 फीसदी बुकिंग एमाउंट देते ही फ्लैट खरीदार बिल्डर प्रोजेक्ट के हिस्सेदार हो जाते हैं। ऐसे में बिल्डर बिना उनकी इजाजत प्रोजेक्ट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकते। बुकिंग कराने से पहले केडीए द्वारा फाइनल रूप से स्वीकृत नक्शे को अवश्य देखना चाहिए।
परिवर्तन से पहले केडीए से भी अनुमति जरूरी
एडवोकेट मधु ददलानी ने बताया कि अपार्टमेंट एक्ट ने आवंटियों को खासे अधिकार दिए हैं। बस जरूरत है तो अधिकारों को जानकर अपना हक लेने की। नियम-4 के मुताबिक बिल्डर ने जो भी सैंक्शन और डिस्पोज्ड नक्शा ब्रोशर में दिखाया है, उसमें किसी भी परिवर्तन से पूर्व केडीए के साथ ही आवंटी से भी इजाजत लेनी होगी। अब बिल्डरों को एक साथ पूरा एफएआर लेना होगा।
क्या है परचेजेबल एफएआर
परचेजेबल एफएआर मतलब खरीद योग्य फ्लोर एरिया रेशियो। मतलब बिल्डर ने प्रोजेक्ट का जो नक्शा पहले स्वीकृत कराया है, उसमें किए गए अतिरिक्त निर्माण को केडीए में निर्धारित शुल्क जमाकर वैध करवा सकता है। इसी कारण बिल्डर पहले जो नक्शा पास कराते हैं, बाद में परचेजेबल एफएआर के नाम पर नये निर्माण कर लेते हैं। फ्लैट खरीदारों को पूर्व नक्शे में जहां बच्चों के खेलने की जगह दिखाई जाती है, मालूम चलता है वहां बिल्डर का ऑफिस या नया टावर खड़ा है।
यहां भी करते हैं खेल
- बेसमेंट में होनी चाहिए पार्किंग। शहर के अधिकतर प्रोजेक्ट के बेसमेंट में एक्सट्रा फ्लैट, दुकानें या बिल्डरों के ऑफिस हैं।
- ग्रीन एरिया की जगह बनाई जाती है पार्किंग। कई प्रोजेक्ट में तो ओपेन स्पेस में भी बनी हैं इमारतें।
- पांच मंजिल स्वीकृत नक्शे पर बनती अतिरिक्त दो मंजिलें। बाद में हो जाती कंपाउंडिंग। सामुदायिक सुविधाओं में नहीं होता इजाफा।
- 60 फीसदी कब्जे के बाद बिल्डर को आरडब्ल्यूए को सोसायटी हैंडओवर करना अनिवार्य। पर ऐसा नहीं करते। मेंटनेंस चार्ज कहीं और ही खर्च करते।
- नियमानुसार प्रोजेक्ट में होनी चाहिए अलग-अलग नार्मल और सर्विस लिफ्ट। एक ही सर्विस लिफ्ट लगाई जाती, वह भी लोकल कंपनी की।