सरवनखेड़ा। नोन नदी का जल स्तर बढ़ने से 12 से अधिक गांव प्रभावित है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंच जाने से उन्हें फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। इधर, बुधवार शाम से बढ़े स्तर की वजह से जिठरौली-पतारा मार्ग में भरतपुर पियासी गांव के पास पुलिया से ओवरफ्लो हुआ पानी सड़क तक बहना लगा। इससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। तेज बारिश से नोन नदी उफना गई है। नदी के दोनों तरफ की करीब 100 मीटर की जमीन डूब गई है।
जिठरौली, तड़वारा, हृदयपुर, बिल्टी, अहिरानी, सैंथा, हिलौथी, मुर्रा, भरतपुर पियासी, निनाया सहित करीब 12 गांवों की तिली, ज्वार, बाजरा, मक्का फसलें जलमग्न हैं। इधर पानी कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है। अब जल स्तर बढ़ने से पानी जिठरौली-पतारा मार्ग में भरतपुर पियासी गांव के पास बनी पुलिया के ऊपर से सड़क पर बह रहा है। पुलिया की सड़क पर तेज बहाव होने से वाहन चालक खतरे के बीच वाहन निकालने को मजबूर है।
वहीं, तेज बहाव को देखकर कई वाहन चालक रूट को छोड़कर दूसरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हो रहे है। वहीं कई चार पहिया वाहन चालक तेज बहाव को देखकर वापस लौट कर घाटमपुर से गजनेर पहुंचकर गंतव्य को जाने को विवश है। सैंथा गांव के मो. हासिम ने बताया कि उन्हें जरूरी काम से पतरा जाना था लेकिन सड़क के ऊपर से हो रहे तेज बहाव को देखकर उसे पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। वह बीस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर घाटमपुर होकर पतरा पहुंचे।
वहीं, क्षेत्र के अन्य लोगों ने बताया कि पियासी के लोगों को अगर तरगांव, पतारा व घाटमपुर जाना हो तो वह अब जिठरौली-पतरा मार्ग से भरतपुर पियासी होकर नहीं जा सकते। उन्हें घाटमपुर जाने के लिए गजनेर होते हुए जाना पड़ेगा। ऐसे में बीस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगेगा। पियासी ग्राम प्रधान लालबहादुर ने बताया कि तीन दिनों से समस्या बनी हुई है। जल स्तर कम नहीं हुआ है। इधर सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो रही है।