राजपुर। सिकंदरा में कानपुर- इटावा हाईवे किनारे कूड़ा एकत्र कर आग लगाई जा रही है। सुलगते कूड़े से नगर की आबोहवा प्रदूषित हो रही है। वहीं, हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। लोगों की इस समस्या पर जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं।बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने और हवा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए खुले में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध है। कूड़ा जलाने वालों पर जुर्माना का प्रावधान है। बावजूद इसके हाइवे किनारे कूड़ा जलाने पर रोक नहीं लग पा रही हैं।
सिकंदरा नगर पंचायत के 11 वार्डों से साफ सफाई के बाद निकले कूड़ा-कचरे को नगर से दो किलोमीटर दूर संदलपुर रोड स्थित जटियापुर में बनाए गये कूड़ा निस्तारण केंद्र (एमआरएफ सेंटर) ले जाकर कूड़ा निस्तारण का दावा किया जाता है। हालांकि नगर के लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के कर्मचारी कूड़े को एमआरएफ सेंटर पहुंचाने में कोताही करते हैं। अक्सर सूर्या फ्लाई ओवर के नीचे से बिरहाना की ओर जाने वाले हाईवे किनारे डंप कर देते हैं। अधिक कूड़ा इकट्ठा होने पर इसमें आग लगा दी जाती है। हाईवे किनारे सुलगते कूड़े से आबोहवा दूषित हो रही है। इससे राहगीर परेशान होते हैं।
शनिवार को कूड़े में लगी आग रविवार पूरे दिन सुलगती रही। इससे हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों, राहगीरों को परेशानी हुई। हाइवे किनारे रहने वाले रमेश कश्यप, मोहित कुशवाहा, सुघर सिंह, कमल कुशवाहा, दरोगा कुशवाहा आदि ने बताया कि कूड़े में आग लगने से पर्यावरण में जहर घोला जा रहा है। पर्यावरण को लेकर बनाए गए कानून का पालन नहीं हो रहा है। कूड़ा सुलगने से आवोहवा दूषित हो रही है साथ ही पेड़ो की जड़ें टहनियां और पत्तियां को नुकसान पहुंच रहा है। नगर पंचायत के ईओ प्रदीप कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की ओर से हाइवे किनारे कूड़ा नही डंप किया जा रहा है। कूड़ा कहां से डंप हो रहा है इसकी छानबीन कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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कूड़े के साथ झुलस गए शीशम के पेड़
राजपुर। वन विभाग लाखों रुपये खर्च करके हर वर्ष सड़कों के किनारे पौधे लगाता है। हाईवे किनारे कूड़ा जलाने के चक्कर में पेड़ भी आग की भेंट चढ़ रहे हैं। इससे वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ में हरित क्रांति को भी नुकसान हो रहा है। शनिवार को लगाई गई कूड़े में आग से शीशम के पेड़ भी झुलस गए हैं। सिकंदरा तहसील के अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी नियमित इसी नेशनल हाईवे से सुबह शाम धुएं के गुबार के बीच वाहनों को दौड़ा कर निकल जाते हैं। वहीं, सरकारी व गैर-सरकारी विभागों की ओर से पर्यावरण का संदेश दिया जाता है लेकिन यही संदेश देने वाले पेड़ों में लग रही आग को देखते हैं और आगे निकल जाते है। इसकी सूचना भी देना जरूरी नहीं समझते। (संवाद)