पवन अब भी चल रहा है फरार
जानकारी के बावजूद पवन और संगीता कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। वारंट पर पुलिस हर तारीख पर औपचारिक आख्या भेज दे रही थी। इस पर कोर्ट ने सख्ती बरती और कहा कि अभियुक्तों के अधिवक्ता हर तारीख पर न्यायालय में आकर पैरवी कर रहे हैं, लेकिन पनकी थानाध्यक्ष वारंट का पालन नहीं करा पा रहे हैं। इसलिए आठ अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर जवाब दें। आदेश की जानकारी होते ही आनन-फानन पुलिस टीम ने संगीता के घर की घेराबंदी की और शुक्रवार सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया। संगीता को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। हालांकि पवन अब भी फरार चल रहा है।
पत्नी पर प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या का है आरोप
दयाराम के भाई अनुज कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा था कि मेरे बड़े भाई दयाराम कानपुर देहात के ग्राम विकास इंटर कॉलेज बुधौली में शिक्षक थे। उनका विवाह वर्ष 2009 में संगीता से हुआ था। वर्ष 2017 में संगीता के अवैध संबंध पवन कुमार से हो गए। पवन के दोस्त संजीव कुमार हैं। संजीव की पहली पत्नी निशा से उसके संबंध खराब चल रहे थे, क्योंकि संजीव ने निशा की सगी बहन मयंक कुमारी को पत्नी बना लिया था। संजीव को शक था कि निशा के संबंध दयाराम से हैं। इस कारण संजीव कुमार, संगीता देवी और पवन कुमार ने दयाराम की हत्या का षडय़ंत्र रचा। 28 जनवरी 2024 को दयाराम को पतरसा बुलाया। देर रात दयाराम ने भाई अनुज को फोन कर बताया कि संजीव ने उसे कमरे में बंद कर आग लगा दी है। मुझे बचा लो। अनुज, अपने ससुर पप्पू उर्फ राजेंद्र सोनकर, चाचा ननका व चचेरे भाई दीपक आदि के साथ जब तक पहुंचा तब तक दयाराम की मौत हो चुकी थी। कमरा बाहर से बंद था और अंदर आग जल रही थी। अनुज ने संजीव, संगीता और पवन तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस ने सिर्फ संजीव को पकड़ा और बाकी दोनों को बख्श दिया था।
अभियोजन ने कुर्की के लिए दी थी अर्जी
एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि अभियोजन ने कुर्की का आदेश जारी करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। वहीं, पवन और संगीता की ओर से अधिवक्ता ने तलबी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की बात कही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई स्थगनादेश जारी नहीं किया था। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित न करने की बात कही थी। हालांकि कुर्की की आदेशिका जारी नहीं की गई थी।