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सेंसर परखेंगे ड्राइविंग, तब लाइसेंस

Sat, 06 Feb 2016 02:07 AM IST
मनीष निगम/कानपुर
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शहर में जल्द ही सेंसर युक्त ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट ट्रैक बनेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने किसान नगर-बिधनू मार्ग पर साढ़े तीन बीघा जमीन आवंटित कर दी है। भवन और ट्रैक के निर्माण के लिए दो संस्थाओं से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
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यह योजना केंद्रीय भूतल एवं परिवहन विभाग की है। इसके तहत प्रथम चरण में कानपुर और लखनऊ में रीजनल आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक और माडल इंसपेक्शन (निरीक्षण) सेंटर बनेगा। आरटीओ कानपुर (संभागीय परिवहन विभाग) को जमीन आवंटित कर दी गई है। 14 करोड़ अनुमानित लागत मूल्य रखा गया है।

आरटीओ सूत्रों के अनुसार नया ट्रैक आधुनिक होगा। जरा सी गलती पर दोबारा टेस्ट ड्राइव करनी होगी। सेंसर युक्त ट्रैक पर कैमरे लगेंगे। इसकी रिकॉर्डिंग आप ऑनलाइन देख सकेंगे। कंप्यूटर ऑपरेटर आपकी हर मूवमेंट (ड्राइविंग) को कैद कर प्रिंट आउट निकालेगा। तब जाकर ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा।
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वहीं यहां बनने वाले माडल इंसपेक्शन सेंटर में कामर्शियल वाहनों का कंप्यूटर से निरीक्षण होगा, साथ ही ड्राइवरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। निर्माण के लिए यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से प्रस्ताव मांगे गए हैं। जल्द ही आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक, माडल इंसपेक्शन सेंटर का निर्माण शुरू हो जाएगा।

गाड़ी चलाकर दिखाओ मिल जाएगा लाइसेंस
अभी तक आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस मैनुअल तरीके से बनाया जाता है। आरटीओ परिसर में बने ट्रैक पर आवेदक को वाहन चलाकर दिखाना होता है। दूर बैठे आरआई  आवेदक की ड्राइविंग देखकर ओके कर देते हैं। इसके बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बन जाता है।

ऐसा होगा आधुनिक ट्रैक
ट्रैक में दाखिल होते ही वीडियोग्राफी होने लगेगी।
ट्रेनिंग सेंटर में एक कक्ष में कंप्यूटर लगेंगे।
ट्रैक में जगह-जगह सेंसर लगेंगे। चालक ने एल या यू टर्न पर जरा सी गलती की तो लालबत्ती जल जाएगी। गियर और ब्रेक लगाने या क्लच दबाने में चूक हुई तो कंप्यूटर फेल कर देगा। दुबारा उसे टेस्ट देना होगा।
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ड्राइविंग टेस्ट देने वाले का ऑनलाइन रिकॉर्ड होगा। कोई भी अपना या अपने परिवार के सदस्य का ड्राइविंग टेस्ट देखना चाहेगा तो ऑनलाइन देख सकेगा।
यहां हुई टेस्टिंग के सारे विवरण का प्रिंट आउट लिया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके।

माडल इंसपेक्शन सेंटर
कामर्शियल वाहनों के लिए सेंटर में छह रैंप होंगे।
कंप्यूटर के जरिए हैवी वाहनों (कामर्शियल वाहनों) का निरीक्षण होगा। कहीं भी कुछ गड़बड़ी हुई तो रेड लाइट जल जाएगी।

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