एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) में मंगलवार को गंगा में गिर रहे टेनरियों के कचरे को लेकर दिल्ली में सुनवाई हुई। इसमें कानपुर की टेनरियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का मामला उठाया गया।
एमसी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में एनजीटी चेयरमैन न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने यूपी सरकार से पूछा है कि गंगा में टेनरियों का प्रदूषित कचरा जाने से रोकने के लिए क्या योजना है। यदि टेनरियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है तो यह कैसे और कब होगा। प्लान बनाकर दिखाएं।
मामले पर सुनवाई सात अक्टूबर को भी होगी। इससे पहले भी टेनरियों को महानगर से शिफ्ट करने का मामला उठाया जा चुका है, लेकिन टेनरी एसोसिएशन के दबाव के चलते यह संभव नहीं हो पाया है। इस मामले में ऑल ओवर इंडिया इन्वायरमेंटल सस्टेनेबल कमेटी के सदस्य
असद के. इराकी का कहना है कि टेनरियों को गंगा किनारे से शिफ्ट करने से प्रदूषण का मामला हल नहीं होने वाला है। आवश्यक यह है कि टेनरियों से निकलने वाले कचरे को किस तरह प्रदूषण मुक्त किया जाए। जहां भी टेनरी रहेगी, बिना व्यवस्था के वहीं प्रदूषण फैलेगा। उन्होंने बताया कि टेनरियों के मसले पर एनजीटी में सुनवाई पहले 16 अक्तूबर को होनी वाली थी, अचानक इसे बदलकर 6 अक्तूबर कर दिया गया।
इसी वजह से वह और कमेटी के चेयरमैन राजीव जालान इसमें शामिल नहीं हो सके। इराकी ने बताया कि बुधवार को होने वाली सुनवाई में क्लीन गंगा मसले से जुड़े एक और मामले पर सुनवाई होनी है। पहले इसकी तारीख 13 अक्तूबर थी।
इलेक्ट्रो फ्लोमीटर को लेकर टेनरी मालिकों में हलचल:टेनरियों से कितना प्रदूषित कचरा युक्त पानी बाहर निकाला गया, इसकी जांच के लिए सभी टेनरियों में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लोमीटर लगाना जरूरी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव एससी यादव की तरफ से डीएम को भेजे पत्र से टेनरी मालिकों में हलचल है।
देर शाम जाजमऊ टेनर्स एसोसिएशन ने इस मामले में चर्चा भी की। सचिव ने पत्र में कानपुर की 165 टेनरियों में यह मीटर नहीं लगने की बात कही है। इस संबंध जाजमऊ टेनर्स एसोसिएशन का कहना है कि 99 प्रतिशत टेनरी में यह मीटर लगाया जा चुका है।