विशेष अदालत एससी/एसटी के न्यायाधीश सैय्यद सरवर हुसैन रिजवी ने उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव और उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधक अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर की अपील बुधवार को खारिज कर दी। दोनों अधिकारियों ने छेड़छाड़ के मामले में दाखिल परिवाद को खारिज करने की अपील की थी। उनके खिलाफ इस मुकदमे की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में चल रही है। विशेष अदालत ने सीजेएम कोर्ट के फैसले को बहाल रखा है। अब दोनों अधिकारियों के खिलाफ महिला से छेड़छाड़ और धमकी का मुकदमा चलेगा। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः हाजिर न होने पर गैर जमानती वारंट जारी...
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फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज थाने के एक गांव की महिला ने 2007 में वकील हरिनाथ सिंह के माध्यम से जिले में तैनात तत्कालीन एडीएम जेपी चौरसिया (वर्तमान में विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन) और नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार यादव (वर्तमान में डिप्टी डायरेक्टर उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधक अकादमी) के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था। कोर्ट ने अपना पक्ष रखने के लिए दोनों अफसरों को तलब किया। इनके हाजिर न होने पर गैर जमानती वारंट जारी हुए। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः सुनवाई विशेष अदालत एससीएसटी में हुई...
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इस पर जेपी चौरसिया और संजय यादव ने मुकदमा खारिज करने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें महिला के आरोपों को गलत बताया गया था। तत्कालीन सीजेएम ने 18 अगस्त 2017 को दोनों अधिकारियों का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। दोनों अधिकारियों ने इस आदेश के खिलाफ वकील महेश यादव के माध्यम से जिला जज की कोर्ट में अपील दाखिल की। यहां से केस ट्रांसफर किए जाने पर इसकी सुनवाई विशेष अदालत एससीएसटी में हुई।
बुधवार को न्यायाधीश ने अधिकारियों की अपील खारिज कर सीजेएम के 18 अगस्त के आदेश को बरकरार रखा। अब इन पर छेड़छाड़ व धमकी का मुकदमा सीजेएम कोर्ट में चलेगा। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः क्या है पूरा मामला...
यह था मामला
दर्ज कराए गए परिवाद में महिला ने आरोप लगाया था कि जेपी चौरसिया ने नौकरानी का काम दिए जाने के लिए एक दिन शाम उसे अपने घर पर बुलाया। जब वह उनके घर पर पहुंची तो वहां संजय यादव भी थे। दोनों अधिकारियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध पर धमकाया और घर से भगा दिया। पुलिस के रिपोर्ट दर्ज न करने पर उसने अदालत की शरण ली थी।