उत्तर प्रदेश सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन आम मरीजों तक पहुंचाने में असफल साबित हो रही है। सीएम योगी ने कितने भी वादे किए हो पर जमीनी हकीकत में इस जीवन रक्षक इंजेक्शन के आभाव में मरीज अपनी जान गवां रहे हैं ।
प्रयागराज के रहने वाले माजिद साबिर (66) को परिजन कानपुर इस उम्मीद से लाए थे कि अच्छा इलाज मिलेगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं, रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर उन्हें इतना दौड़ाया गया कि बहुत देर हो चुकी थी। इंजेक्शन तो मिल गया लेकिन लगने से पहले ही मरीज की जान चली गई।
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प्रयागराज के फातिमा हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराकर माजिद को चुन्नीगंज के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को डॉक्टर ने रेमडेसिविर लाने को कहा और बताया कि अस्पताल में नहीं है। तीमारदार नजम उर्सला में सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा से मिले।
उन्होंने कहा कि अस्पताल से लिखाकर लाइये। तीमारदार अस्पताल आए तो प्रबंधन ने कहा कि वे रिकमेंड नहीं करेंगे। अपना रोगी ले जाइये। अस्पताल को इतने इंजेक्शन नहीं मिलते कि सबको दें। वे फिर सीएमओ के पास गए। उन्हें फिर अस्पताल भेजा गया। शुक्रवार रात रोगी की हालत गंभीर हो गई। शनिवार को प्रबंधन के उसी अधिकारी ने रिकमेंड कर दी।
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इस पर डीएम आवास से उन्हें दवा तो मिल गई लेकिन इस बीच रोगी की मौत हो गई। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने 25-25 हजार के दो इंजेक्शन और मंगवाए थे। ये इंजेक्शन रोगी को लगे कि नहीं इसकी भी जानकारी नहीं है। नजम का कहना है कि किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया।