शोध और खोज की प्रक्रिया को समय-सीमा में नहीं बांधी जा सकता है। यह काम टीम वर्क का होता है। समर्पण, लगन और धैर्य से काम करने पर सफलता मिलती है। यह विचार क्योटो विवि जापान के पूर्व प्रो. सकाई यूमुरा ने व्यक्त किए।
वह बुधवार को कानपुर यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की फ्यूचरिस्टिक मैटेरियल्स एंड इमरजिंग ट्रेंड इन केमिकल साइंसेस की कार्यशाला में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान पद्मश्री इरशाद मिर्जा को सम्मानित भी किया गया।
डीबीएस कॉलेज की तीन दिवसीय कार्यशाला के आखिरी दिन जापान के प्रोफेसर ने कहा कि रिसर्च स्कॉलर को एक दूसरे की नकल करने से बचना चाहिए।
अमेरिका के बोस्टन से आए प्रो. संजीव मुखर्जी ने कहा कि अब औद्योगिक इकाइयों की मदद से रिसर्च प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। जैसा कि अमेरिका में होता है। भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां के विज्ञानी, स्टूडेेंट और चिकित्सकों ने दुनिया में झंडा फहरा रखा है। अब जरूरत शोध और तकनीक विकसित करने का माहौल बनाने की है।
प्रो. बीएल खंडेलवाल ने भी कहा कि अच्छा रिसर्च टीम वर्क का नतीजा होता है। प्रिंसिपल प्रो. अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का लाभ रिसर्च स्कॉलर को जरूर मिलेगा।
संयोजक डॉ. एससी दीक्षित, डॉ. सीएम सक्सेना, डॉ. सुमन कटियार, डॉ. सुधीर त्रिपाठी और डॉ. सपना त्रिपाठी ने इनवायरमेंटल साइंस की जानकारी दी। डॉ. कैलाश भार्गव ने धन्यवाद दिया।
कविता फर्स्ट
अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में 52 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। वीएसएसडी कॉलेज की कविता श्रीवास्तव, रायबरेली के डॉ. अभिषेक कुमार और डीबीएस के हर्ष मिश्रा को पहला, दूसरा, तीसरा पुरस्कार मिला। बांदा की छवि पोरवाल, रोहतक की अंजू मलिक, सोनी चौहान, एचबीटीआई के वेद कुमार, एमिटी लखनऊ के नितिन श्रीवास्तव, संगीता वाजपेयी और रोहतक के गोविंद गोहट ने रिसर्च पेपर की जानकारी भी दी। उद्योगपति सीएस भार्गव ने रिसर्च में सहयोग का भरोसा दिलाया।