कानपुर देहात। टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षकों के साथ माती कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा है। जिलाध्यक्ष मिथिलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों को नियम से मुक्त किया जाना चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी योग्यता 27 जुलाई 2011 से अनिवार्य की गई है। इसके पहले जो भी शिक्षक नियुक्त हुए हैं, उन्होंने उस समय के अनुसार प्रक्रिया को पूरा किया है। नियुक्ति के बाद कोई भी अन्य योग्यता को लागू करना न्यायोचित नहीं है। इससे लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं और वह असहज महसूस कर रहे है।
संगठन के कोषाध्यक्ष अजय पाल यादव ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति नियमानुसार हुई थी और उन्होंने सेवाकाल के शुरू में ही सभी शैक्षिक योग्यताएं पूरी कर ली थीं। बाद में टीईटी को अनिवार्य बनाने से उनकी नौकरी असुरक्षित हो गई है। जिला मंत्री नारायण वाजपेई ने कहा कि दो साल में सभी शिक्षकों से टीईटी उत्तीर्ण करवाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए पुराने शिक्षकों को इस नियम से मुक्त रखा जाए। यहां संगठन मंत्री रजत अग्निहोत्री व सुशील कटियार, मीडिया प्रभारी रमाशंकर शुक्ला, उपाध्यक्ष महेंद्र अवस्थी, अनुपम पाठक, सुबोध कुमार, राजेश द्विवेदी, ज्ञानेश दीक्षित आदि मौजूद रहे।