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Kanpur News: स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों पर कॉपियों के मूल्यांकन का भार

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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शिक्षक गंभीर नहीं हैं। महज 20 से 30 प्रतिशत शिक्षक ही केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि मूल्यांकन का अधिकांश भार स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों पर आ गया है। अनुदानित कॉलेजों के शिक्षक प्रक्रिया से दूरी बनाए हैं। इस पर विवि प्रशासन ने प्राचार्यों को पत्र जारी कर उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीरता दिखाने के लिए कहा है।
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सीएसजेएमयू प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जिसने विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं समय से पहले कराईं और 25 नवंबर से मूल्यांकन कार्य भी प्रारंभ कर दिया। विश्वविद्यालय से जुड़े सात जिलों में कुल 26 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं जहां डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन कराया जा रहा है। अनुदानित कॉलेजों के शिक्षक इन केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में पाया कि कई बड़े और प्रतिष्ठित कॉलेजों के शिक्षकों की भागीदारी बेहद कम है। लगभग 100 शिक्षकों वाले कुछ कॉलेजों से केवल 20 शिक्षक ही मूल्यांकन कर रहे हैं।
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जनता डिग्री कॉलेज बकेवर में भी 24 से अधिक शिक्षकों में से केवल नौ शिक्षक ही अब तक जुड़े हैं। महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने सभी प्राचार्यों को पत्र जारी कर मूल्यांकन कार्य में शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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