कानपुर देहात। दिव्यांग बच्चों को जरूरत के मुताबिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संचालित प्रशस्त एप पर शिक्षकों के प्रशिक्षण की रफ्तार धीमी है। इसमें निजी स्कूलों की स्थिति सबसे खराब है। यहां महज दो फीसदी शिक्षक ही प्रशिक्षण पूरा कर सके हैं। शासन की ओर से एक अक्तूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 13,379 शिक्षकों में से 4504 शिक्षक ही एप पर ऑनबोर्ड हुए हैं। यानी अभी 66.3 फीसदी शिक्षक ऑनबोर्ड नहीं हो सके हैं। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में जिला 50वें पायदान पर है।
प्रशस्त 2.0 एप को एनसीईआरटी एवं सीआईईटी की ओर से विकसित किया गया है। इसमें 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की समय पर पहचान से संबंधित जानकारी देने के लिए 10 वीडियो उपलब्ध है। इनमें कुछ वीडियो चार से पांच मिनट के हैं जबकि कुछ की अवधि 10 मिनट तक है। सभी वीडियो की कुल अवधि लगभग 40 मिनट है। बच्चों की स्क्रीनिंग और पहचान से जुड़ी जानकारी को गंभीरता से समझने के लिए वीडियो में स्किप करने का विकल्प नहीं है।
ऐसे में पूरी प्रक्रिया में वीडियो देखना जरूरी है लेकिन शिक्षक इसके लिए 40 मिनट नहीं निकाल पा रहे हैं। जिले में 3903 शिक्षकों ने सभी प्रशिक्षण वीडियो देखे हैं। जो कुल शिक्षकों का महज 29.2 फीसदी है। इससे साफ है कि अधिक संख्या में शिक्षक अभी प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं। शासन स्तर से सभी शिक्षकों को एप पर जल्द से जल्द ऑनबोर्ड कराने और प्रशिक्षण पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही शिक्षक विशेष जरूरत वाले बच्चों की पहचान और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेंगे। विभाग की ओर से इसे 10 अक्तूबर तक पूरा कराने के लिए निजी विद्यालयों के शिक्षकों को वीडियो देखने के लिए प्रेरित करने की कवायद ब्लॉक क्वालिटी को-आर्डिनेटर, ब्लॉक एमआईएस इंचार्ज, शिक्षक एआरपी एवं शिक्षक संकुल के माध्यम से पूरी कराई जा रही है।
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विशेष बच्चों की पहचान के लिए प्रशिक्षण है जरूरी
जिले में प्रशस्त एप 2.0 का कार्यक्रम अगस्त के मध्य से शुरू हो चुका है। प्रशस्त एप के माध्यम से विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में संभावित दिव्यांगता और विशेष शैक्षिक जरूरतों की शुरुआती पहचान की जानी है। स्क्रीनिंग के दौरान ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनकी जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों से जांच, आकलन और परामर्श दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर दिव्यांगता प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड बनवाने में भी मदद की जाएगी।
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बयान.....
जनपद में प्रशस्त एप देख कर प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही जनपद का प्रदेश स्तर की रैकिंग में भी सुधार हुआ है। परिषदीय व निजी विद्यालय जल्द से जल्द प्रशस्त 2.0 पर उपलब्ध सभी वीडियो देखकर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की प्राथमिकता है कि अधिक से अधिक शिक्षक प्रशस्त एप से जुड़कर प्रशिक्षण पूरा करें, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय से पहचान कर उन्हें जरूरी शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सके। - आशीष कुमार पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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10 वीडियो ट्यूटोरियल्स में ये विषय हैं शामिल
गति विषयक-लोकोमोटर दिव्यांगताः बच्चों में शारीरिक या चलने-फिरने से जुड़ी समस्याओं की समझ, अवलोकन और पहचान। दृष्टिबाधिता : कम दिखाई देने या पूरी तरह देखने में असमर्थ बच्चों के लक्षणों की पहचान श्रवणबाधिता : सुनने में कठिनाई या बहरेपन से जुड़े व्यावहारिक लक्षणों की समझ
वाक एवं भाषा दिव्यांगता : बोलने या भाषा से जुड़ी अक्षमताओं को पहचानने के तरीके
बौद्धिक दिव्यांगता : मानसिक विकास और बौद्धिक क्षमता में कमी वाले बच्चों के शुरुआती लक्षण
विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता : पढ़ने, लिखने या गणितीय गणना में आने वाली कठिनाइयों (जैसे डिस्लेक्सिया आदि) की पहचान
अन्य मानसिक स्वास्थ्य एवं क्रोनिक बीमारियां : मानसिक बीमारी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, सेरेब्रल पाल्सी और अन्य विशिष्ट दिव्यांगताओं की पहचान एवं डेटा प्रविष्टि
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एक नजर में जाने स्थिति
कुल शिक्षक - 13379 ऑनबोर्ड शिक्षक - 4504
ऑनबोर्डिंग- 30.5 प्रतिशत
सभी वीडियो देखने वाले - 3903
सभी वीडियो देखने की स्थिति - 29.2 प्रतिशत