सतना एसपी राजेश हिंडगकर, शिक्षक
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में सात दिन बाद गुरुवार को दोनों शिक्षक डकैतों के चंगुल से छूट कर घर पहुंच गए। गांव में चर्चा है कि परिजनों ने दो लाख की फिरौती दी, तब जाकर डकैतों ने उन्हें छोड़ा। पुलिस का दावा है कि काबिंग बढ़ने से डकैतों ने शिक्षकों को मुक्त किया।
जिले की सीमा से सटे नया गांव मध्य प्रदेश थानाक्षेत्र के थर पहाड़ से 22 दिसंबर की शाम को डकैतों ने दो शिक्षक फूल सिंह गौड़ और रामप्रताप पटेल उर्फ पप्पू का अपहरण कर दस लाख की फिरौती मांगी थी। इसमें क्षेत्र के डाकू नवल धोबी गैंग का नाम आया था। सातवें दिन गुरुवार को दोनों शिक्षक अचानक गुप्तगोदावरी स्थित अपने घर पहुंच गए। मूल रूप से टेढ़ी गांव के निवासी दोनों शिक्षकों के परिजन भी पहुंचे और सभी ने एक दूसरे के गले मिलकर सलामती पर खुशी जताई।
शिक्षकों ने बताया कि डकैतों ने उनकी आंख पर पट्टी बांध कर रखा था। गैंग में ज्यादा असलहे नहीं है और सात लोग हैं। वे सिर्फ कंबल ओढ़ कर रहते हैं। नया गांव थाना प्रभारी सुधाशूं त्रिवेदी मय फोर्स पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों शिक्षकों का स्वास्थ्य खराब होने से ज्यादा बातचीत नहीं करेंगे।
पुलिस अधीक्षक दोनों से बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ले रहे हैं। सतना के पुलिस अधीक्षक राजेश हिंडगकर पुलिस की सक्रियता से डाकुओं ने शिक्षको को छोड़ दिया। मध्य प्रदेश पुलिस ने डाकू नवल धोबी गैंग के सेजवार निवासी दिनेश रजक, खुन्नू उर्फ अगवेश रजक, कैलाश कहार, विजय उर्फ मोटू और दीपक शिवहरे पर दस-दस हजार का इनाम घोषित किया है।