कानपुर देहात। पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की भावना जगाने की मुहिम रक्षा सूत्र कार्यक्रम से शुरू की गई है। अभियान की शुरुआत सोमवार को डेरापुर वन रेंज के सरगांव खुर्द में पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर की गई। इस दौरान लोगों ने पौधों की सुरक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम 29 अगस्त तक चलेगा।
रोपित पौधों की सुरक्षा हो तो हरियाली तेजी से बढ़ सकती है। आम लोगों को इसके लिए जागरूक होना जरूरी है। इसी मंशा से प्रदेश सरकार ने रक्षा सूत्र कार्यक्रम की शुरुआत की है। रक्षाबंधन से लेकर एक सप्ताह तक लोगों को पौधरोपण व उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाना है। इसके तहत जुलाई में लगाए गए पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा का संकल्प लिया जाएगा।
वन विभाग ने जुलाई में 169 स्थानों पर 29.39 लाख पौधे लगाए हैं। वहीं अन्य बीस विभागों ने 8140 स्थलों पर 26.29 पौधे रोपित किए। सोमवार को डेरापुर वन रेंज के सरगांव खुर्द में वन दरोगा शिवम पांडेय व ग्रामीणों ने पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा का संकल्प लिया। इस गांव में ग्राम समाज की 20 हेक्टेयर भूमि पर करीब चालीस हजार पौधे लगाए गए हैं।
रक्षा सूत्र बांधने का कार्यक्रम जन जागरूकता से जुड़ा है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार की ओर से मिले आदेश के क्रम में इस वर्ष लगाए पौधों व धरोहर के तौर पर चिह्नित पीपल के तीन वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा का संकल्प लिया गया है। यह कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा।
- एके द्विवेदी, डीएफओ, कानपुर देहात
तीन धरोहर वृक्षों को भी बांधा रक्षा सूत्र
कानपुर देहात। जिले में धरोहर वृक्ष के तौर पर पीपल के पुराने व धार्मिक महत्व के वृक्ष चिह्नित किए गए हैं। इसमें रसूलाबाद वन रेंज में मैजू समस्तपुर न्योराज व तिश्ती के रिवरी तालाब किनारे लगा पीपल का पेड़ चिह्नित किया गया है। जबकि तीसरा धरोहर वृक्ष डेरापुर रेंज में नंदपुर नहर कोठी पर लगा पीपल का पेड़ है। सोमवार को वन कर्मियों ने ग्रामीणों को साथ लेकर इन धरोहर वृक्षों को भी रक्षा सूत्र बांधा। (संवाद)
रक्षा सूत्र बांध शिखा मनाती पौधों का जन्मदिन
कानपुर देहात। प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन त्योहार से पौधे लगाने और रोपित पौधों की सुरक्षा की भावना जगाने के लिए रक्षा सूत्र बांधने की पहल शुरू की है। वहीं मैथा ब्लॉक के टिकरी गांव की शिखा सिंह उर्फ आकांक्षा वर्ष 2017 से रोपित पौधों का जन्मदिन मनाती हैं।
हर साल वह 26 मई को लगाए पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर जन्मदिन मनाती आ रही हैं। वर्ष 2016 में शिखा ने गांव में खाली भूमि पर अमलताश, बेल, पीपल, नीम, आंवला आदि के सौ पौधे लगाए थे। अब ये पौधे बड़े हो गए हैं। हरियाली बढ़ाने में योगदान के लिए उन्हेें अंतरराष्ट्रीय गांधी पर्यावरण पुरस्कार भी मिल चुका है।