कानपुर की बाजारों ने करेंसी की किल्लत से निपटनेका रास्ता निकाल लिया है। फुटकर बाजार में ‘करेंसी नहीं तो क्या हुआ, ई कैश तो है न’ पर अमल करते हुए तमाम दुकानदारों ने पेटीएम, विभिन्न बैंकों के ई-वॉलेट का इस्तेमाल शुरू कर दिया तो वहीं थोक बाजार में भी चेक दौड़ते दिखे। बड़ा चौराहा पेट्रोल पंप के पास होजरी-रेडीमेड गर्म कपड़ों की सेल संचालित कर रहीं पूनम गुप्ता ने कैश के साथ ही स्वाइप मशीन, पेटीएम का विकल्प भी अपना लिया है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद अभी भी लोग 1000 और 500 के पुराने नोट देकर माल खरीदना चाहते हैं। दुकानदार हों या खरीदार, सभी थोड़ी जागरुकता रखें तो कोई परेशानी है ही नहीं। अब कैश की कोई खास किल्लत नहीं है। हमराज काम्प्लेक्स में खरीदारों की चहल-पहल दिखी। मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे ने बताया कि चेकों के जरिए बिक्री-खरीदारी हो रही है। व्यापार की गति धीमी है, क्योंकि जब चेक क्लियर हो जाता है, तभी माल भेजते हैं। बैंकों में चेक क्लियर होने में 10-15 दिन तक लग रहे हैं। गांव-कस्बों के व्यापारी चेक काटने में भी गलती कर रहे हैं, इस कारण लेनदेन अटक रहा है। लेकिन अच्छी बात है कि लोग चेक से लेन-देन की आदत डाल रहे हैं। गीतानगर में इंद्रजीत यादव की यादव चाय वाला के नाम से चाय की दुकान है। कोचिंग मंडी से जुड़ा हुआ इलाका होने के कारण यहां छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या होती है। दुकानदार ने बताया कि नोटबंदी के बाद नगद की दिक्कत होने के चलते ग्राहकों के कहने पर पेटीएम एप डाउनलोड किया। अब उनकी दुकान पर आने वाले छात्र-छात्रायें नगद के बजाय पेटीएम से पेमेंट देते हैं। इंद्रजीत ने बताया अब उन्हें रोज 40 फीसदी पेमेंट पेटीएम से ही मिलती है। काकादेव में सब्जी विक्रेता विजयलक्ष्मी की दुकान पर भी पेटीएम से भुगतान लेने की सुविधा है। विजयलक्ष्मी ने बताया उनके पुत्र गुड्डु का मोबाइल पेटीएम से जुड़ा है। किदवई नगर के जंगली देवी मंदिर में पेटीएम से दान लेने की सुविधा शुरू हो गई है।