सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में संपर्क में आए 16 लोगों के सैंपल लिए हैं। वहीं जिले में एक और 53 वर्षीय महिला में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 50 वर्षीय व्यक्ति को बुखार और सांस लेने में परेशानी के बाद लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ समय बाद उनकी 56 वर्षीय भाभी की भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी लखनऊ ले जाया गया। जांच में दोनों के स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
24 घंटे में देवर-भाभी की मौत
इलाज के दौरान दो सितंबर की देर रात 50 वर्षीय व्यक्ति की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। अगले दिन तीन सितंबर को उनकी 56 वर्षीय भाभी ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतका के बेटे ने पॉजिटिव जांच रिपोर्ट के साथ स्वास्थ्य विभाग को दोनों की मौत की सूचना दी।
16 लोगों के लिए गए सैंपल
सूचना मिलने के बाद रविवार को सीएचसी प्रभारी डॉ. मंजेश के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम अटवा बैक गांव पहुंची। टीम ने मृतकों के संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाई। ऐसे 16 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें आरटीपीसीआर जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजा गया है।
एक और महिला में संक्रमण की पुष्टि
जिले में 53 वर्षीय महिला में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। बुखार और सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बेहतर उपचार के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
तीन दिन में गांव में चार मौतों से हड़कंप
अटवा बैक गांव में देवर-भाभी की मौत के अलावा दो बुजुर्गों की भी बीमारी के बाद मौत हुई है। 60 वर्षीय परमेश्वर की शुक्रवार को और 80 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद की बृहस्पतिवार को मौत हुई थी। हालांकि, इन दोनों मौतों को स्वाइन फ्लू से जोड़कर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। तीन दिन के भीतर चार लोगों की मौत से गांव में चिंता का माहौल है।
स्वास्थ्य विभाग बोला- आधिकारिक सूचना नहीं मिली
एसीएमओ डॉ. जयराम सिंह ने बताया कि अस्पताल या लैब की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। परिजन की ओर से ईमेल के माध्यम से दी गई सूचना के आधार पर टीम भेजकर जांच कराई गई है। संभावित मरीजों के सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं।
पहले ही सामने आ चुके हैं संक्रमण के मामले
एक दिन पहले कानपुर मंडल में स्वाइन फ्लू संक्रमण को लेकर सामने आई स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। कानपुर में स्वाइन फ्लू से पहली मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि उन्नाव में कई संक्रमित मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच का दायरा बढ़ाया था।