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सरकारी जमीन पर बना है स्वराज वृद्धाश्रम

Tue, 23 Dec 2014 02:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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पनकी स्थित जिस स्वराज वृद्धाश्रम में गरीबों के लिए जगह नहीं है, उसकी नींव भी फर्जीवाड़े पर पड़ी है। ग्राम समाज की जमीन को किसी ने अपना बताकर मंजू भाटिया को दान दे दिया और उन्होंने बिना किसी जांच-पड़ताल के उस पर वृद्धाश्रम खड़ा कर दिया।
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पब्लिक कॉल में शिकायत मिलने पर अमर उजाला ने इस वृद्धाश्रम की हकीकत जानने के लिए पड़ताल जारी रखी तो यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

यहां हम स्पष्ट कर दें कि हमारा उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज सेवा की आड़ में स्याह-सफेद करने वाले तत्वों की असलियत समाज के सामने लाना है।

सदर तहसील के रिकॉर्ड की पड़ताल में मिली जानकारी के मुताबिक पनकी (बारा सिरोही) स्थित स्वराज वृद्धाश्रम ग्राम सभा की जमीन पर बना है। यह जमीन ऊसर में दर्ज है। इसका प्रबंधन 1978 में केडीए को दिया गया था। केडीए का कहना है कि यह आश्रम अवैध है।
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स्वराज वृद्धाश्रम की संचालिका को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर, आश्रम की जमीन खुद की बताने वाले छेदीलाल भी जमीन के स्वामित्व के संबंध में कोई वैध कागजात नहीं दिखा सके।

आश्रम संचालिका मंजू भाटिया का कहना है कि यह जमीन आश्रम के लिए छेदीलाल ने ही दान में दी थी। वृद्धाश्रम ग्राम सभा की ऊसर भूमि पर 2007 में बनाया गया था। तहसील के रिकॉर्ड के मुताबिक बारा सिरोही गांव की अराजी संख्या 1038 क्षेत्रफल 1.4440 हेक्टेयर और अराजी संख्या 1039 क्षेत्रफल 2.5730 हेक्टेयर ऊसर में दर्ज है।

उत्तर प्रदेश शासन की अधिसूचना दिनांक छह सितंबर 1978 के आधार पर इस जमीन को तब नगर महापालिका कानपुर में निहित कर दिया गया था। ऊसर का प्रबंधन कानपुर विकास प्राधिकरण में निहित कर दिया गया था।

इस बाबत तहसीलदार अनिल कुमार उपरोक्त तथ्यों की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि तहसील रिकॉर्ड के मुताबिक बारा सिरोही की अराजी संख्या 1038 और अराजी संख्या 1039 ग्राम सभा की ऊसर जमीन में दर्ज है।

आश्चर्य है कि बिना आवंटन के इस जमीन पर वृद्धाश्रम कैसे बन गया। चूंकि इस जमीन का प्रबंधन केडीए के पास है, इसलिए इस बारे में केडीए ही कुछ बता सकेगा।

यह जमीन मैंने 1992 में खरीदी थी पर जिससे खरीदी थी उसका नाम याद नहीं है। मंजू भाटिया ने यहां वृद्धाश्रम खोलने के लिए दो कमरे की जगह देने का आग्रह किया तो मैंने उनकी बात मान ली।

तब उन्होंने वादा किया था कि यहां पर इसी जमीन के एक हिस्से में स्कूल भी बनवा देंगी, जिसका प्रबंधन मेरे पास रहेगा। धीरे-धीरे उन्होंने सारी जमीन पर कब्जा कर लिया और आश्रम बना डाला।

अब वह सीधे मुंह बात भी नहीं करतीं। किसी मामले में मुझे फंसाकर यहां से भगाने का प्रयास कर रही हैं। मेरे पास अब जमीन के कागजात भी नहीं हैं। हां, नगर निगम में 2007 तक हाउस टैक्स जमा किया है। उसकी रसीद है।

- छेदी लाल पाल, 22 ए स्वराज आश्रम बारा सिरोही, गड़रियनपुरवा सेक्टर -18

बारा सिरोही की जिस जमीन पर स्वराज वृद्धाश्रम बना है। हमारे रिकॉर्ड के अनुसार वह जमीन ग्राम समाज की है। इसे एलाट करने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। केडीए से यह जमीन हस्तांतरित करने का कोई उल्लेख केडीए में नहीं मिल रहा है।

इस मामले में वृद्धाश्रम को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा।

- राकेश यादव, संयुक्त सचिव, केडीए


बारा सिरोही में जिस जमीन पर स्वराज वृद्धाश्रम बना है। हमने उसकी जांच करा ली है। नगर निगम के रिकॉर्ड में जीआईएस सर्वे के बाद वहां के मकान नंबर 22ए में छेदीलाल का नाम लिखा है, पर चूंकि वह जमीन ग्राम समाज की है।

इसलिए हम उस पर हाउस टैक्स नहीं लगा सकते। इसलिए उस पर टैक्स नहीं लगाया गया है।

अतुल सिंह, जोनल प्रभारी, जोन-6, नगर निगम

दो टूक  मंजू भाटिया संचालिका स्वराज वृद्धाश्रम

जहां स्वराज वृद्धाश्रम बना है, वह जमीन आपने किससे खरीदी?

मैने जमीन खरीदी नहीं है, बल्कि वृद्धाश्रम के लिए छेदीलाल और उसके तीनों भाइयों ने मुझे नि:शुल्क दी थी। स्टांप पेपर पर इसकी लिखापढ़ी भी है।
 पर, केडीए और तहसील के रिकॉर्ड में यह जमीन ग्राम समाज की है और ऊसर के रूप में दर्ज है।

इस जमीन को न तो किसी को आवंटित किया गया न ही कोई आश्रम बनवाने की परमीशन दी गई, पर यह कैसा बना?

छेदीलाल ने अपनी जमीन बताकर इसका एक हिस्सा मुझे दान में दिया था। 2007 में मैंने स्वराज वृद्धाश्रम बनवाया। यह सच है कि केडीए से परमीशन नहीं ली थी। चार साल बाद मैं इसकी रजिस्ट्री कराने केडीए गई तो पता चला कि यह जमीन ग्राम समाज की है। इसके बाद मैंने तब इसकी रजिस्ट्री कराने के लिए केडीए के तत्कालीन वीसी राममोहन यादव और तत्कालीन कमिश्नर शालिनी प्रसाद को पत्र दिया, पर जवाब नहीं मिला।

 आपने जमीन लेते समय इसके मालिकाना हक संबंधी कागजों की पड़ताल नहीं की थी?

दरअसल, छेदीलाल उस समय बड़े विश्वास के साथ कह रहा था कि जमीन उसकी है तो पड़ताल भी नहीं की। उस समय यह जमीन केडीए की नहीं थी।

क्या आप मानती हैं कि यह गैरकानूनी है?

नहीं, हमने कोई गुनाह नहीं किया पर बिना जांच कराए वृद्धाश्रम खोला। सड़क पर पड़े लोगों को पनाह दी। चार साल बाद जब असलियत पता चली तो मैं इतने वृद्धों को दोबारा सड़क पर कैसे छोड़ती? छेलीलाल ने वहां पत्थर लगवाया है।

उसमें उसके चारों भाइयों के नाम लिखे हैं। छेदीलाल के पास भी चार कमरे हैं।

 छेदीलाल तो कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ दो कमरों के लिए जमीन दान में दी थी, पर अब आपने पूरी जमीन कब्जा ली?

छेदीलाल क्या कहते है क्या नहीं, मुझे नहीं पता। वह समय-समय पर मुझसे सेलरी लेते रहे हैं। शराब पीकर आने पर विवाद के बाद सेलरी बंद कर दी गई।

अब आपका अगला कदम क्या होगा?

अब इसका नवीनीकरण कराना चाहेंगे। हम तो वही काम कर रहे हैं जो सरकार को करना है। आडिट 2013-14 तक कंप्लीट है। मैं यह भी बताना चाहूंगी कि आश्रम में 11 लोगों को पेंशन के रूप में 300-300 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।

वह भी उनके बैंक खाते में जाते है। मैं नहीं लेती। हमारे यहां कोई मैनेजर नहीं है। कल आप आश्रम में अंदर आकर खुद असलियत देखिए। पहली खबर में आपने मैनेजर के रूप में जिन श्याम सुंदर का वर्जन निकाला, वह ब्लाइंड हैं।
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मधुराज हास्पिटल में भर्ती हैं। चार लोग हास्पिटल में हैं। मैं स्वयं 65 साल की बीपी और हार्ट पेशेंट हूं। मुझे भी जेल भेज दो (झल्लाते हुए)।
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