‘पश्चिमी सभ्यता अपनाने से भारत में एकल परिवार, सामाजिक विघटन व वृद्धाश्रमों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जबकि दूसरी ओर विदेशों में भारतीय संस्कृति की धूम मची हुई है। भारत का युवा वर्ग पश्चिमीसभ्यता को अपना आदर्श मान रहा है। जबकि पश्चिमी लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं।’ यह कहना है कि जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि का। वह रविवार को कानपुर पहुंचे थे।
कानपुर के सलेमपुर रूमा में श्रीबालाजी सरकार मंदिर में चल रहे प्राण प्रतिष्ठा समारोह में स्वामी अवधेशानंद भारतीय संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। यहां उन्होंने बताया कि योग, टेक्नोलाजी,
चिकित्सा व अभियांत्रिकी का डंका पूरे विश्व में बज रहा हैं। केवल न्यूयार्क में योग के 37 हजार सेंटर होना इसका उदाहरण है। भारतीय संस्कारों के बल पर ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।
यह पहला अवसर है जब शासक, प्रशासक व उपासक एक साथ हैं। अब देश में शासन करने वाले लोग देवालयों में जाने में गौरवान्वित महसूस करते हैं। जल संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार व सामाजिक संगठन जल संकट को लेकर सतर्क न हुए तो इसके दुष्परिणाम भावी पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
उधर, मंदिर में समारोह के चौथे दिन देवी प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया गया। गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इस मौके पर स्वामी सत्यमित्रानंद और अवधेशानंद महाराज ने प्रतिमा विग्रहों की डोली को कांधा देकर रवाना किया।
इस मौके पर बंगरा के छोटे महाराज, मनोज सेंगर, संतोष अग्रवाल, सुरेंद्र गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, अशोक त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। मनोज सेंगर ने बताया कि सोमवार को समारोह का अंतिम दिन है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद भंडारा आयोजित होगा। साथ ही स्वामी गोविंद देव गिरि, महंत हरि सिद्ध शरण महाराज जैसे मनीषी अपना मार्ग दर्शन देंगे।