टीडीएस कटौती की राशि वापस लेने के लिए फर्जीवाड़ा करने वालों की अब खैर नहीं, जल्द ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड देश भर में ऐसे मामले खंगालने के लिए व्यापक अभियान चलाएगा। शहर में हुए इस तरह के फर्जीवाड़े की जानकारी कानपुर कार्यालय ने केंद्रीय बोर्ड को भेजी है।
इसके साथ ही एक रिपोर्ट में तमाम केस स्टडीज, जरूरी सबूत भी बोर्ड को मुहैया करा दिए गए हैं। इसके अलावा आयुध निर्माणी के कुछ और मामलों में आयकर विभाग अभियोजन चलाने की तैयारी में जुटा है। मामला बोर्ड से जुड़ा होने के नाते कोई भी क्षेत्रीय आयकर अधिकारी खुलकर इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं है।
शहर के पांचों आयुध कारखानों के अलावा रेलवे, बीएसएनएल और सीपीडब्लूडी समेत तमाम विभागों के कर्मचारियों के रिटर्न में गलत जानकारियां देकर करोड़ों का रिफंड क्लेम ले लिया गया। ज्यादातर ने अपना निर्धारित वेतन कम दर्शाया है। वहीं तमाम ने मकान होने के बावजूद एचआरए लेने के लिए फर्जी रसीदें प्रस्तुत की हैं।
बड़ी संख्या में लोग ऐसे भी हैं, जिनके सलाहकारों ने धोखाधड़ी करके रिफंड हड़प लिया है। अकेले कानपुर में पकड़े गए तीन हजार मामलों की पड़ताल शुरू हुई और नोटिस पहुंचने पर बड़ी संख्या में लोगों ने रिफंड की राशि लौटानी शुरू कर दी। 31 मार्च तक करीब छह करोड़ से ज्यादा की रकम आयकर विभाग को वापस भी मिल गई है।
वहीं जिन्होंने रिफंड नहीं लौटाया है, उनसे यह पैसा पेनाल्टी और ब्याज के साथ वसूलने की कार्रवाई शुरू हो गई है। कुछ प्रमुख मामलों में अभियोजन की तैयारी भी है, जो माह अंत तक नजर आ जाएगी। आयकर विभाग के सूत्रों की मानें तो फर्जी दस्तावेज के सहारे जिन बैंकों में खाते खोले गए हैं, उनके अधिकारियों से भी जल्द पूछताछ की जाएगी।
सूत्रों की मानें तो मिलीभगत के चलते केवाईसी दस्तावेजों का सत्यापन भी नहीं किया गया है। इसी क्रम में एक विभाग ने प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन को एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें पूरे घपले के तरीकों की जानकारी दी गई है। साथ ही साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए हैं।
आयकर अधिकारियों के मुताबिक इस मुद्दे को बोर्ड ने संजीदगी से लिया है। एक उच्चस्तरीय बैठक में इस संबंध में चर्चा भी हो चुकी है। जल्द ही इस प्रकार के मामलों की पड़ताल के लिए देश भर के आयकर कार्यालयों को बोर्ड की ओर से निर्देश जारी होंगे।