कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर(सीएसए) में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज हुआ। तिलहन सरसों में आत्मनिर्भरता हेतु नवीन दृष्टिकोण विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देश के कई बड़े विशेषज्ञों ने शिरकत की। कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में तिलहन की गुणवत्ता और उत्पादन पर काफी ध्यान दिया गया है। इसका नतीजा है कि इस बार राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला कृषि कर्मठ पुरस्कार यूपी को मिलेगा।
शाही ने बताया कि उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के लिए नई नीति लाई जा रही है। इसके अनुसार प्रत्येक जनपद के लिए अलग-अलग फसलों की योजना तैयार की जाएगी। जिससे किसानों की छोटी-छोटी समस्याएं भी दूर हो सकें और हर फसल के क्षेत्र में बेहतर विकास हो सके।
ये फैसला दर्शाता है कि सरकार किसानों, गरीबों के साथ खड़ी है
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1.5 लाख वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनेगी। प्रत्येक यूनिट पर आठ हजार रुपये खर्च होंगे जिसमें 6000 रूपये सरकार की तरफ से अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के कृषि विकास को डिजिटलाइज्ड करने की बात कही। बताया कि किसानों को मौसम की जानकारी, उनके क्षेत्र में मिट्टी की स्थिति, मौसम के अनुसार फसलों की जरूरत, वैज्ञानिक टिप्स सब कुछ मोबाइल पर दिया जाएगा। ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसान सही कदम उठाकर नुकसान से बचा सकें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कानपुर, झांसी और फतेहपुर को सीड हब देकर प्रदेश सरकार ने किसानों को काफी लाभ पहुंचाने की पहल की है। इसके तैयार होने से किसानों को काफी लाभ होगा।
ये फैसला दर्शाता है कि सरकार किसानों, गरीबों के साथ खड़ी है
प्रदेश के कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्र सरकार की तरफ से जारी बजट का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को प्रति वर्ष 6000 रुपये देने का फैसला दर्शाता है कि सरकार किसानों, गरीबों के साथ खड़ी है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने साल के शुरू होते ही 8150 क्विंटल बीज किसानों को उपलब्ध कराया। सरसों के उत्पादन को लेकर सरकार ने कई तरह के कदम उठाए। इन सभी प्रयासों से ही दलहन के उत्पादन में हम लगभग आत्मनिर्भर हो चुके हैं। तिलहन के उत्पादन में भी हम उत्तर प्रदेश को शिखर पर पहुंचाएंगे।