कर्नलगंज में बतौर एसीपी उनकी आखिरी पोस्टिंग थी
ग्रीन पार्क में एक मैच के दौरान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के करीब असलाहा लेकर पहुंचे एक युवक को भी उन्होंने पकड़ा था। कानपुर के कर्नलगंज में बतौर एसीपी उनकी आखिरी पोस्टिंग थी। तीन जून को हुई हिंसा में उपद्रवियों की कमर तोड़ने से लेकर कई उपद्रवियों को पकड़ने में उनका योगदान रहा था।
रक्षाबंधन पर राखी भी बंधवाने आते थे
कोविड के दौरान गरीबों की मदद करने से लेकर कई बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उन्होंने उठाया था। बर्रा में अगवाकर मारे गए संजीत की बहन की पढ़ाई का खर्च भी त्रिपुरारी उठा रहे थे। वह संजीत की बहन को अपनी बहन मानते थे। रक्षाबंधन पर राखी भी बंधवाने आते थे।
जालौन ट्रेनिंग सेंटर में भेजा गया था
शहर के कई डॉक्टरों, अफसरों मददगार भी रहे। तीन जून की हिंसा में कुछ आरोपों को लेकर उन्हें जालौन ट्रेनिंग सेंटर में भेजा गया था। वहां किडनी और लिवर की बीमारी से ग्रस्त थे। वहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे है। एक बेटे की शादी कानपुर में ही हुई है।