छठ पूजा महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को व्रत रखने वाली महिलाओं ने खरना पूजा की। महिलाओं ने सुबह स्नान के बाद धूप, दीप और फूल से अपने आराध्य का पूजन किया।
शाम को स्नान ध्यान के बाद ‘सुन लीं अरजिया हमार छठी मइया..’ गीत गाते हुए नंगे पांव घाटों पर पहुंचीं। वहां वेदी (सिप-सोप्ता) पर फूल चढ़ाकर अस्ताचलगामी सूर्य देव को जल का अर्घ्य दिया और आरती उतारी।
इसके बाद घर पहुंच कर चूल्हे में साठिया चावल, गुड़, गन्ने के रस से बनी खीर व रोटी बना कर प्रसाद स्वरूप खाई और छठ का निर्जला व्रत शुरू किया। महिलाओं ने रात भर पूजा के लिए देसी घी के पुए, ठेकुआ, पूड़ी और पकवान तैयार किए।