कानपुर। गद्दियाना स्थित अल जामियातुल इस्लामिया अशरफुल मदारिस व जामिया अशरफुल निस्वां में खत्म-ए-बुखारी (हदीस) का आयोजन किया गया। मुफ्ती कारी हसीब अख्तर शाहिदी ने छात्रों को बुखारी शरीफ का आखिरी हदीस का पाठ पढ़ाया। उन्होंने इसके लेखक इमाम-ए-बुखारी की जिंदगी से सीख लेने की सलाह दी। बताया कि इमाम-ए-बुखारी ने बहुत सी किताबें लिखीं। मौलाना मो. हाशिम अशरफी ने हदीस मुकम्मल करने वाले छात्रों से कहा कि पहले तुम आम शख्स थे, अब एक आलिम की हैसियत से दुनिया के सामने जा रहे हो। तुम्हारे उठने बैठने को लोग दीन समझेंगे। इसलिए तुम ऐसा काम न करना जो दीन न हो और लोग दीन समझ बैठें। कार्यक्रम की शुरुआत कारी मो. अहमद अशरफी ने तिलावते कुरआन से की। संचालन हाफिज अरशद अशरफी ने किया। यहां शहरकाजी मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही, कारी सगीर आलम हबीबी, मौलाना फतेह मोहम्मद क़ादरी, मौलाना महमूद हस्सान अख्तर, मौलाना कासिम मिस्बाही, मौलाना गुल, मो. जामई, मौलाना सूफियान अहमद मिस्बाही, मौलाना मसूद मिस्बाही आदि मौजूद रहे।