जैन कोर्स को लेकर बढ़ी है रुचि
वहीं, जैन धर्म में नार्थ-ईस्ट को देवता का स्थान माना गया है। नक्षत्रों में भी काफी बदलाव होता है। सूर्योदय से तीन घड़ी मिलने पर ही उस तिथि को मान लिया जाता है। जबकि, सनातन में त्रयोदशी काल का जिक्र किया जाता है। इसके अलावा कर्मकांड में भी काफी अंतर है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि जैन कोर्स को लेकर रुचि बढ़ी है।