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धर्म: जैन समाज का वास्तु-कर्मकांड सीखेंगे CSJMU के छात्र, नए सत्र में होगी शुरूआत…50 सीटों पर होगा प्रवेश

Tue, 25 Mar 2025 01:54 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नए विषयों की शुरुआत के लिए सुमित जैन सहित अन्य लोगों ने कुलपति विनय कुमार पाठक से मुलाकात कर तैयारियों पर चर्चा की है। सुमित ने बताया कि जैन और सनातन के वास्तु में काफी फर्क होता है।
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सीएसजेएमयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में छात्र अब जैन समाज का वास्तु, कर्मकांड सीख सकेंगे। इसके लिए विवि में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत की जाएगी। शुरूआत में 50 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर सीटें बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इस कोर्स के दाखिला के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं रहेगी।

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विवि में 2025-26 सत्र से नए कोर्स की शुरुआत होने जा रही है। इसी क्रम में विवि में पिछले साल आचार्य विद्यासागर सुधासागर जैन शोधपीठ की स्थापना हुई थी। इसके तहत विभिन्न कोर्स की शुरुआत इस साल होने जा रही है। जैन धर्म में मुहूर्त, वास्तु और संस्कार सनातन धर्म की तुलना में अलग होते हैं।
जैन और सनातन के वास्तु में होता है फर्क
नए विषयों की शुरुआत के लिए सुमित जैन सहित अन्य लोगों ने कुलपति विनय कुमार पाठक से मुलाकात कर तैयारियों पर चर्चा की है। सुमित ने बताया कि जैन और सनातन के वास्तु में काफी फर्क होता है। उदाहरण के रूप में सनातन में ईश्वर की मूर्ति रखने का स्थान नार्थ-ईस्ट माना जाता है।

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जैन कोर्स को लेकर बढ़ी है रुचि
वहीं, जैन धर्म में नार्थ-ईस्ट को देवता का स्थान माना गया है। नक्षत्रों में भी काफी बदलाव होता है। सूर्योदय से तीन घड़ी मिलने पर ही उस तिथि को मान लिया जाता है। जबकि, सनातन में त्रयोदशी काल का जिक्र किया जाता है। इसके अलावा कर्मकांड में भी काफी अंतर है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि जैन कोर्स को लेकर रुचि बढ़ी है।

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