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संस्थान का दर्जा खत्म किए जाने से खफा छात्रों ने काटा बवाल 

Fri, 27 Jan 2017 08:19 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

- निदेशक को दफ्तर जाने से रोका
- सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान का दर्जा खत्म होने से नाराजगी
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स्टेप एचबीटीआई
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विस्तार
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सरकारी सहायता प्राप्त मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट का दर्जा खत्म होने से खफा स्टेप एचबीटीआई के स्टूडेंटों ने शुक्रवार को हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए निदेशक प्रो. आरके त्रिवेदी को रोक लिया। दफ्तर में नहीं घुसने दिया। साथ ही 240 स्टूडेंटों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया। यह आंदोलन शनिवार से शुरू होगा। स्टूडेंटों का कहना है कि अब संस्थान में सेल्फ फाइनेंस कोटे से ही एडमिशन होंगे। इसमें फीस ज्यादा देनी होगी। 
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एचबीटीयू के ईस्ट कैंपस में स्टेप एचबीटीआई है। यहां एमबीए और पीजीडीएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट) की पढ़ाई होती है। इसकी संबद्धता एकेटीयू से है लेकिन देखरेख और संचालन एचबीटीयू करता है। एकेटीयू ने सत्र 2017-18 से स्टेप एचबीटीआई का सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान का दर्जा खत्म कर दिया।  इसके चलते स्टूडेंटों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर कैंपस में ही धरना-प्रदर्शन किया। सूचना पर एचबीटीयू के कुलपति प्रो. एमजेड खान भी पहुंचे। स्टूडेंटों से बात की और समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। निदेशक प्रो. आरके त्रिवेदी ने कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान का दर्जा एकेटीयू नहीं छीन सकता है। यह फैसला गलत है। इसका विरोध किया जाएगा। स्टूडेंटों को भड़काकर पठन-पाठन को ठप कराने की साजिश है। 

यूनिवर्सिटी में विलय की मांग खारिज 
एचबीटीयू में मैनेजमेंट का नया स्कूल खोला जा रहा है। इसका भी स्टेप एचबीटीआई के स्टूडेंटों ने विरोध किया। साथ ही मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट को यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनाने की मांग की। कहा कि ऐसा हुआ तो शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि कुलपति प्रो. एमजेड खान ने इसे खारिज कर दिया। कहा कि स्टेप एचबीटीआई का यूनिवर्सिटी में विलय संभव नहीं है। इसका संचालन सोसाइटी से होता है। पीजीडीएम की डिग्री दी जाती है। मैनेजमेंट स्कूल से एमबीए की डिग्री बांटी जाएगी। इसकी सीटें कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) से भरने का फैसला हुआ है।
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