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जानें, क्या थे शहीद देशभक्त नौजवान ‘कैप्टन आयुष के सपने’

Fri, 28 Apr 2017 09:51 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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शहीद कैप्टन आयुष के बारे में जानकर हर किसी की भर आईं आंखें
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शहीद आयुष को देश सेवा का जुनून था। उन्होंने देश विरोधी ताकतों को नेस्तनाबूत और देशवासियों की सुरक्षा का सपना शुरू से देखा था। पिता अरुणकांत ने बताया कि बेटे आयुष ने कानपुर, जाजमऊ डिफेंस कालोनी स्थित सेंट जोजफ स्कूल में प्ले ग्रुप से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी। साल 2009 में इंटरमीडिएट पास करने के बाद आयुष ने वायुसेना में पायलट पद के लिए आवेदन किया था।
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मेधावी आयुष का सेलेक्शन भी हो गया था, लेकिन चंद नंबर कम होने से मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आ पाया। साल 2011 में आयुष ने छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिर्विसिटी से बीसीए किया। फिर एमसीए की पढ़ाई शुरू की। इसी दौरान बेटे की नौकरी सेना में लग गई। आयुष ने एमसीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर सेना की नौकरी ज्वाइन कर ली थी। जब आयुष कक्षा तीन में पढ़ रहा था, तभी से कहता था कि नौकरी करूंगा तो केवल भारतीय सेना की।  चित्रकूट के बरगढ़ थाने में तैनात एसआई अरुणकांत यादव के इकलौते बेटे कैप्टन आयुष के आतंकी हमले में शहीद होने की खबर पहुंची तो घर और मोहल्ले में मातम छा गया। परिवार के लोग फफक पड़े। थोड़ी ही देर में परिवार, रिश्तेदार और मोहल्ले वालों का तांता लग गया।     आज आएगा शव
पिता अरुणकांत ने बताया कि आयुष का शव शुक्रवार को कानपुर शहर आएगा। विमान से शव को चकेरी एयरपोर्ट लाया जाएगा। वहां से शव को आर्मी हास्पिटल ले जाया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि शहीद का अंतिम संस्कार कहां और कितने बजे होगा।
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बाबा, ताऊ, चाचा भी सैनिक बहन मेजर
कैप्टन आयुष यादव परिवार की तीसरी पीढ़ी के थे, जो सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे थे। आयुष के बाबा बीएल यादव ब्रिटिश काल में रॉयल फोर्स में अफसर थे। आयुष के ताऊ तरुणकांत एयर फोर्स में वारंट अफसर और चाचा कृष्ण कांत जूनियर वारंट अफसर रहे हैं। अब तरुणकांत एसबीआई की फतेहपुर शाखा में कार्यरत हैं। आयुष की चचेरी बहन उपासना आर्मी में मेजर हैं और कोलकाता में तैनात हैं। उपासना के पति सतीश पठानकोट पंजाब में मेजर हैं। आयुष के परिवार के कई और भी लोग सेना में हैं।

ड्यूटी पर जा रहे थे, बेटे के शहीद होने की खबर आई
अरुणकांत ने बताया कि वह एक मामले में कोर्ट में बयान देने यहां आए थे। बुधवार को बयान दर्ज कराने के बाद घर आ गए थे। बृहस्पतिवार को ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी टीवी पर आतंकी हमले की खबर चली। हालांकि उन्होंने गौर नहीं किया। इसके बाद बंगलूरू में रहने वाले भतीजे राहुल ने आतंकी हमले की सूचना दी। वह बेटे के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान कर्नल दुष्यंत सिंह घर आए और उन्होंने बेटे के शहीद होने की सूचना दी। थोड़ी देर बाद जम्मू के आर्मी हेड क्वार्टर से भी सूचना दी गई।

फरवरी में घर आया था आयुष
कैप्टन आयुष की बहन रूपल यादव बैंक ऑफ इंडिया की महाराजपुर शाखा में मैनेजर हैं। पांच फरवरी को उनकी शादी इंजीनियर भूपेंद्र से हुई थी। बहन की शादी में आयुष घर आए थे। तब 10 दिन रुके थे। जाते समय रूपल से कहा था वह जल्द फिर घर आएंगे।

घर के सामने सेना ने लगाया कैंप
कैप्टन आयुष यादव की शहीद होने की सूचना मिलते ही सेना उनके घर पहुंची। परिवार के लोगों को सांत्वना देने के साथ ही घर के बाहर कैंप (टेंट) लगाकर कुर्सियां डलवाईं। दो फौजी लगातार वहां तैनात रहे। घर के बाहर भी फोर्स तैनात रही।

अफसर और नेता पहुंचे सांत्वना देने
आयुष के शहीद होने की सूचना मिलने पर एडीएम सिटी केपी सिंह, एसीएम आनंद सिंह, चकेरी इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह, कैंट विधायक सुहेल अंसारी, विधायक अमिताभ वाजपेयी, सपा नेता चंद्रेश सिंह, मोहम्मद हनीफ उर्फ अफजाल, कांग्रेस के फिरदौस अजहर समेत कई लोग भी उनके घर सांत्वना देने पहुंचे। आईजी जकी अहमद ने फोन पर आयुष के परिजनों का हालचाल लिया।

आसपास के लोगोें ने बंद कीं दुकानें 
आयुष के शहीद होने की खबर पाकर आसपास के दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दीं। आसपास के घरों के भी चूल्हे नहीं जले।

जुलाई में गुरुदासपुर में करना था ज्वाइन
परिजनों के मुताबिक आयुष का ट्रांसफर गुरुदासपुर हो गया था। उन्हें जुलाई में ज्वाइन करना था। परिजनों के मुताबिक रूपल की शादी के बाद अब परिवार वाले आयुष की शादी की तैयारी में लगे थे। कई रिश्ते भी आए थे, जिन पर विचार चल रहा था। 
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