दोनों बहनों के मरने के बाद बाथरूम में जाकर फावड़ा धोया
खुद को बचाने के लिए उसे भी फावड़े से हमला कर मार डाला। बताया कि वह रोशनी को नहीं मारना चाहती थी, लेकिन सिर पर भूत सवार था। जो बीच में आ रहा था उसे मार डालने की इच्छा कर रही थी। बताया कि दोनों बहनों के मरने के बाद बाथरूम में जाकर फावड़ा धोया और उसे आंगन में पड़े टिनशेड के नीचे यथास्थान पर रख दिया।
चिल्लाना शुरू कर दिया, ताकि किसी को शक न हो
इसके बाद खून से लथपथ कपड़े धोकर नहाया। इसके बाद कपड़े सूखने डाल बाहर से कुंडी लगाकर खेत पर चारा लेने चली गई। वहां से सबके साथ ही आई थी, लेकिन कमरे में जाकर उसने सबसे पहले चिल्लाना शुरू कर दिया ताकि उस पर किसी को शक न हो।
इन पांच मुख्य सुराग से खुलासे तक पहुंची पुलिस
- घर में सूख रहे कपड़े देखकर पुलिस को सबसे पहले घर के कोई व्यक्ति के घटना में शामिल होने की आशंका हुई।
- शवों पर मोटे धारदार हथियार से हमला किया गया था। वहीं, बच्चियों के शरीर का कोई भी हिस्सा गायब नहीं था। ऐसे में बलि देने जैसी बात पुलिस को नहीं लगी।
- टिनशेड में रखा फावड़ा पूरी तरह साफ था। उसे देखकर लग रहा था कि उसे कुछ देर पहले ही धोया गया है। उसके एक हिस्से पर हल्के खून के निशान भी थे।
- कपड़ों के बारे में पूछने पर अंजली के सकपकाने से पुलिस का शक और बढ़ता गया।
- पूछताछ में बच्चियों के माता-पिता से अंजली की शिकायत करने की बात पता चलने पर मामले के सच तक पुलिस पहुंच गई।
दो घंटे में पुलिस के सामने हो चुकी थी तस्वीर साफ
सूचना पर पहुंचे एसपी देहात सत्यपाल सिंह, एसपी सिटी कपिल देव सिंह, सीओ अतुल प्रधान और फोरेंसिक टीम की पड़ताल में लगभग पूरा मामला स्पष्ट हो चुका था। आंगन में सूख रहे कपड़ों को देखकर ही अधिकारियों को घर के व्यक्ति की शामिल होने की संभावना हो गई थी।
पुलिस की सख्ती देखकर अंजली ने घटना कबूली
कपड़ों के बारे में अंजली की मां सुशीला देवी से पूछा, तो उन्होंने कपड़े धोने की बात से इन्कार कर दिया। इस पर पुलिस ने अंजली से पूछा तो वह सकपका गई। पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो पहले हां और फिर न करने लगी। रातभर पुलिस को बयान पलटकर परेशान करने के बाद सुबह करीब पांच बजे पुलिस की सख्ती देखकर अंजली ने घटना कबूली। इस पर पुलिस ने कपड़ों के साथ ही फावड़ा, कपड़े धोने वाला ब्रश सभी कब्जे में ले लिए।
घर में होता कन्हैया, तो चली जाती उसकी भी जान
घटना के वक्त छोटा भाई कन्हैया बाहर गांव के लड़कों के साथ खेल रहा था। पुलिस के अनुसार, यदि वह भी घर पर होता तो शायद उसकी भी जान चली जाती। एसपी देहात ने बताया कि दोनों बहनों की देखभाल अंजली ही करती थी।
खुलासा होते ही हत्यारोपी बेटी से माता-पिता ने नहीं की कोई बात
पूछताछ के दौरान माता-पिता एक ही बात कर रहे थे। बच्चियों की मां सुशीला ने बताया कि शाम को चार बजे वह खेत पर गई थी। पांच बजे उसके पति भी खेत पर आ गए। बड़ी बेटी भी करीब दो घंटे के बाद उनके पीछे खेत पर गई थी। लेकिन अंजली पूछताछ में बार-बार अपने बयानों से पलट रही थी। कड़ाई से पूछताछ के बाद हत्यारोपी बहन ने घटना कबूल की। यह सुनते ही उसके माता-पिता के होश उड़ गए और उन्होंने अपनी बेटी से कोई बात नहीं की।
पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
जसवंतनगर। सोमवार शाम दोनों मासूम बच्चियों का अंतिम संस्कार उनकी पैतृक निजी जमीन पर कर दिया गया। इस दौरान भारी पुलिसबल तैनात रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने दोनों बच्चियों को अंतिम विदाई दी। इस घटना के बाद गांव में जगह-जगह चर्चाओं का दौर बना रहा। इस दौरान पूर्व ब्लाक प्रमुख अनुज मोंटी यादव व अन्य लोग मौजूद रहे।
खोजी कुत्ते मृतक बहनों के घर से बाहर बने घेरे तक ही गए
उधर, आईजी प्रशांत कुमार ने भी रविवार रात करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की थी। उन्होंने एक-एक कर सभी परिजनों से अलग-अलग बातचीत की। इसके बाद इटावा व कानपुर की फोरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड को भी घटनास्थल पर बुला लिया गया। खोजी कुत्ते मृतक बहनों के घर से बाहर बने घेरे तक गए और वहां से लौट आए।