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आंधी ने कुछ न छोड़ा

Wed, 25 May 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर
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आंधी-तूफान से पनकी गंगागंज रोड पर एचटी लाइन के एक दर्जन से ज्यादा खंभे गिर गए। - फोटो : amarujala
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कानपुर। सोमवार देर रात सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने शहर को अस्त-व्यस्त कर दिया। शिवराजपुर और बाबूपुरवा में दीवार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। वहीं बिजली गिरने से रनियां में एक महिला ने दम तोड़ दिया। रूरा में आंधी से पेड़ की डाल किसान पर गिर गई, जिससे उसने मौके पर ही मौत हो गई। 28 घंटे बिजली न मिलने से गुस्साए लोगों ने सबस्टेशनों पर हमला बोल दिया। किदवईनगर में केस्को की गाड़ियां तोड़ी गईं, कर्मियों को पीटा गया। पुलिस पर पथराव भी हुआ। उधर, मंगलवार देर रात बारिश फिर शुरू हो गई।
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कमजोर जड़ की वजह से गिरे पेड़
तेज धूप, पारा चढ़ने और वातावरण में कम नमी के कारण पेड़ की जड़ों तक पानी नहीं पहुंच सका। इससे जड़ सूख गई और तेज आंधी के साथ पेड़ उखड़कर गिर पड़े।  ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के साइंटिस्ट डॉ. एके दुबे से बात करके कारण तलाशने की कोशिश की। इस पर डॉ. दुबे ने कहा कि यह कह पाना कठिन है कि सबसे ज्यादा पेड़ किस प्रजाति के गिरे हैं लेकिन जैसी आंधी आई थी, उसमें पेड़ गिरना स्वाभाविक था। गर्मी की वजह से पेड़ के तने सूख गए हैं। वातावरण की कम नमी भी पेड़ों की मजबूती को प्रभावित करती है। डॉ. दुबे ने कहा कि सड़क के किनारे लगे पेड़ों के गिरने की वजह इर्द-गिर्द किया गया कंक्रीटाइजेशन है। पेड़ों के तने के चारों तरफ डामर या कंक्रीट का फर्श बना देने से जड़ों को विस्तार नहीं मिल पाता और पेड़ अंदर ही अंदर कमजोर हो जाते हैं।  

तूफान ने गुल की पूरे शहर की बिजली
सोमवार रात को आए तूफान से शहर भर की बिजली गुल हो गई। रात भर बिना बिजली के लोग तड़पते रहे। बिजली न आने से लोगों के घरों में पीने का पानी तक नहीं बचा। फ्लैट में रहने वालों ने जनरेटर की व्यवस्था कराकर सबमर्सिबल पंप से टंकी में पानी भरवाया। वहीं, बिठूर, इंदिरा नगर और दयानंद विहार के आसपास बुधवार शाम तक बिजली आएगी। बिजली विभाग के 125 खंभे उखड़ने के साथ 350 से अधिक जगहों पर फॉल्ट हुए हैं। शहर के 82 सबस्टेशनों को फॉल्ट से बंद करना पड़ा। सभी 18 डिवीजनों में लाइनें पेड़ गिरने की चपेट में आकर टूट गईं। मंगलवार को शहरवासी दिनभर फोन घनघनाते रहे लेकिन बिजली कब आएगी, इसकी सही जानकारी नहीं पा सके। शहर के कुछ इलाकों में दिन में, कहीं शाम को और कई मुहल्लों में देर रात वैकल्पिक फीडरों से बिजली दी गई।
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गड़बड़ाया बीसएनएल
आंधी पानी ने शहर के दूरसंचार सेवाएं भी ठप कर दी। सारे दिन लोग अपनों से बात करने के लिए परेशान रहे। इंटरनेट सुविधाएं ठप होने से लोगों को कई काम रुक गए। बीएसएनएल अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार देर रात तक नेटवर्क सही हो जाएगा। इसके लिए कई टीमें लगाई गई हैं।  सोमवार देर रात आए आंधी पानी ने शहर के  लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया। सारे शहर की दूरसंचार सेवाएं ठप हो गईं। जिससे रास्तों में फंसे लोग अपने घरों में सूचना भी नहीं दे सके। इंटरनेट सेवाएं भी धड़ाम हो गईं। इनमें प्रमुख रूप से डाकघर की बैंकिंग सेवा ठप रही। उधर, बीएसएनएल के डीजीएम, वीएन मिश्रा ने कहा कि आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि टावरों के  एंटीने की दिशा और दशा दोनों ही बिगड़ गई। लाइट न मिलने से भी समस्या बढ़ी। हमारी बैट्री भी डाउन हो गई हैं। सारा काम डीजल इंजन से किया जा रहा है। मंगलवार देर रात तक बीसएनएल की सेवाएं सही हो जाएगी।
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