तत्कालीन एसएसपी यशस्वी यादव के समय का शहर का चर्चित स्टिंग ऑपरेशन स्पेशल सीजेएम हरेंद्र बहादुर सिंह की कोर्ट में नहीं ठहर सका। फर्जी मेडिकल बनाने के मामले में पूर्व सीएमएस डॉ. शैलेंद्र तिवारी और वार्ड ब्वाय वीर प्रताप यादव को बरी कर दिया गया।
वादी और स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो बनाने वाले दोनों ही कोर्ट में मुकर गए। कोर्ट ने 25 पेज का फैसला सुनाते हुए जिलाधिकारी और आईजी कानपुर जोन को भी कॉपी भेजी है। लोकमन मोहाल निवासी विपिन गुप्ता ने उर्सला अस्पताल के तत्कालीन सीएमएस डॉ. शैलेंद्र तिवारी, वार्ड ब्वाय वीर प्रताप यादव और एक अन्य के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा था कि उसे जानकारी मिली थी कि अनायास ही लोग अपनी दुश्मनी निकालने के लिए सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्साधिकारियों को पैसा देकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनवाकर कानूनी प्रक्रिया का मजाक बना रहे हैं। इस पर वो 20 अगस्त 2013 को विश्व बैंक कालोनी बर्रा निवासी समाजसेवी संजय सिंह के साथ उर्सला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र तिवारी के पास गए।
वार्ड ब्वाय वीर प्रताप यादव और डॉ. शैलेंद्र तिवारी के अज्ञात दोस्त मिले। इन्हें वादी ने अपना काल्पनिक नाम राकेश गुप्ता बताकर दहेज हत्या से बचने के लिए हार्ट पेशेंट का फर्जी सर्टिफिकेट बनाने को कहा। डॉ. शैलेंद्र तिवारी के दोस्त ने कहा कि एक लाख रुपये दो पूरा काम हो जाएगा।
21 अगस्त को दोबारा गया तो डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने 14 हजार रुपये लेकर नाम और पता नोट कर लिया। अगले दिन सुबह 10 बजे आने को कहा। 22 अगस्त को जब वह पहुंचा तो डॉ. शैलेंद्र तिवारी पहले ही बैक डेट ओपीडी के पर्चे तैयार करके रखे थे। इसके बाद फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर अपने साइन किए। इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो बना ली गई थी। इस मामले में डॉ. शैलेंद्र तिवारी को 25 अगस्त 2013 को गिरफ्तार कर लिया गया था।
यह मामला स्पेशल सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। डॉ. शैलेंद्र तिवारी के अधिवक्ता सुनील कुमार पांडेय और आनंद सेट्ठी ने बताया कि वादी विपिन कुमार और वीडियो बनाने वाला संजय दोनों ही कोर्ट में मुकर गए।
विवेचक अजय कुमार वर्मा और जय प्रकाश शर्मा ने भी कोर्ट में समर्थन किया कि विवेचना तत्कालीन एसएसपी के दबाव में की गई थी। इस पर कोर्ट ने तत्कालीन सीएमएस डॉ. शैलेंद्र तिवारी और वार्ड ब्वाय वीर प्रताप यादव को दोषमुक्त करार दिया।