बकाया रकम की वापसी न होने पर स्टेट जीएसटी को कंपनियों के बैंक खाते सीज करने का अधिकार है, लेकिन ये खाते बैंकों और सीबीआई ने पहले ही सीज कर रखे हैं। इसलिए स्टेट जीएसटी के पास ये विकल्प भी नहीं बचा। हालांकि एनसीएलटी में प्रकरण पहुंचने के बाद विभाग को टैक्स की पूरी रकम मिलने की उम्मीद नहीं है। कारण ये है कि कोठारी पर जितनी रकम बकाया है उसकी 10 फीसदी कीमत की संपत्तियां भी उनके पास नहीं हैं।
कंपनी कर निर्धारण वर्ष बकाया रकम
मैसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 545,65,30,206
रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 431,34,49,365
रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 66,86,11,031
कोठारी फूड-फ्रेग्नेंस प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 43,00,00,000
रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 15,36,77,636
कोठारी फूड-फ्रेग्नेंस प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 8,60,08,650
कुल रकम 1110,82,76,888
कोठारी की कंपनियों से वसूली का अब हमारे पास कोई जरिया नहीं है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ही विकल्प बचता है। हम विभाग की ओर से उसमें पैरवी कर रहे हैं। कोठारी की संपत्तियों की नीलामी से मिली रकम में हम टैक्स वसूली की उम्मीद करते हैं।
पीके सिंह, अपर आयुक्त, राज्य वस्तु एवं सेवाकर, कानपुर जोन