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UP: बांदा में 13.34 करोड़ की स्टांप चोरी का खुलासा, 100 रुपये के स्टांप पर 333 करोड़ का करार, ऐसे खुला खेल

Thu, 25 Jun 2026 11:47 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

Banda News: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के 333 करोड़ रुपये के टोल संचालन अनुबंध में 13.34 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का खुलासा हुआ है। स्टांप विभाग ने फर्म के खिलाफ वाद दर्ज कर अन्य सरकारी अनुबंधों की जांच भी शुरू कर दी है।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बांदा जिले में सरकारी राजस्व को चूना लगाने के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के एक टोल एग्रीमेंट में करोड़ों रुपये के लेन-देन के बावजूद महज 100 रुपये के स्टांप पेपर पर अनुबंध किए जाने का मामला सामने आया है। स्टांप एवं निबंधन विभाग की जांच में इस एग्रीमेंट में 13.34 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी पकड़ी गई है।

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यह 333.65 करोड़ रुपये के टोल कलेक्शन एग्रीमेंट से जुड़ा मामला है। जांच में सामने आया है कि जिस दस्तावेज के आधार पर कंपनी को टोल वसूली का अधिकार दिया गया उस पर नियमानुसार करोड़ों रुपये का स्टांप शुल्क जमा होना चाहिए था, लेकिन केवल 100 रुपये का स्टांप लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई।

टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल एग्रीमेंट की जांच की
महानिरीक्षक निबंधन के निर्देश पर चित्रकूटधाम मंडल के उप महानिरीक्षक निबंधन रेहान अहमद खां और बांदा के सहायक महानिरीक्षक निबंधन प्रवीण सिंह सचान की टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल एग्रीमेंट की जांच की। इस दौरान पता चला कि यूपी एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और मेसर्स दातार सिक्योरिटी सर्विस ग्रुप इन कंसोर्टियम विद मे. श्री सांई इंटरप्राइजेज के बीच 10 अक्तूबर 2024 को टोल संचालन संबंधी एग्रीमेंट किया गया था।

फर्म के विरुद्ध स्टांपवाद दर्ज कराया
यह अनुबंध करीब दो वर्ष की अवधि का था और इसकी कुल कीमत 333.65 करोड़ रुपये थी। जांच अधिकारियों ने जब दस्तावेजों का परीक्षण किया, तो पाया कि इतने बड़े वित्तीय अनुबंध पर केवल 100 रुपये का स्टांप शुल्क अदा किया गया है। मामले में संबंधित फर्म के विरुद्ध स्टांपवाद दर्ज कराया गया है।

ऐसे होता है स्टांप चोरी का खेल
किसी भी बड़े अनुबंध, लीज, ठेके, संपत्ति हस्तांतरण या व्यावसायिक समझौते पर सरकार को स्टांप शुल्क देना अनिवार्य होता है। यह शुल्क दस्तावेज की प्रकृति और उसकी वित्तीय कीमत के आधार पर तय किया जाता है। कुछ मामलों में अनुबंध को जानबूझकर दूसरी श्रेणी का दिखाया जाता है व उसकी वास्तविक प्रकृति छिपाई जाती है या फिर कम मूल्यांकन करके स्टांप शुल्क बचाने की कोशिश की जाती है। इससे संबंधित पक्षों को करोड़ों रुपये का फायदा होता है।

अब कई और एग्रीमेंट जांच के घेरे में
इस कार्रवाई के बाद विभाग ने केवल एक मामले तक जांच सीमित नहीं रखी है। नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों, विकास प्राधिकरणों, मंडी परिषदों और अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए बड़े अनुबंधों की भी जांच शुरू कर दी गई है। आशंका है कि कई अन्य मामलों में भी करोड़ों रुपये के स्टांप शुल्क की चोरी सामने आ सकती है।
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जांच में 13.34 करोड़ की स्टांप चोरी का मामला सामने आया है। स्टांपवाद दर्ज करा दिया गया है। अन्य बड़े अनुबंधों की जांच भी शुरू कर दी गई है। जहां भी भारतीय स्टांप अधिनियम के उल्लंघन के मामले मिलेंगे वहां संबंधित पक्षों के खिलाफ स्टांपवाद दर्ज कर नियमानुसार वसूली और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  -प्रवीण सिंह सचान, सहायक महानिरीक्षक, निबंधन
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