नवरात्र में अष्टमी और नवमी को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। एक पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल को जबकि दूसरे के अनुसार 14 अप्रैल को रामनवमी मनाई जा रही है। जबकि सरकारी अवकाश 13 अप्रैल को ही घोषित है। शकुंतला शक्ति पीठ के संस्थापक आचार्य अमरेश मिश्रा ने बताया कि नवरात्र के अंतिम तीन दिन अति महत्वपूर्ण होते हैं।
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नवरात्रि में दीप जलाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
इन दिनों में की गई पूजा अर्चना से माता की कृपा बरसती है। 12 अप्रैल को आर्दा नक्षत्र पदम योग में कालरात्रि की पूजा रात आठ बजे से 12 बजे तक की जाएगी। 13 को प्रात: दस बजे तक अष्टमी महागौरी की पूजा की जाएगी। इसके बाद नवमी सिद्धिदात्री की पूजा एवं दोपहर 12 बजे से राम जन्म महोत्सव मनाया जाएगा।
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आरती लेते भक्त
मित्रयोग होने के कारण इस दिन की गई पूजा से परिवार में सौहार्द का वातावरण पूरे साल रहेगा। 14 अप्रैल को रविपुष्य योग है। सुबह नौ बजे तक नवमी की तिथि रहेगी। इसके बाद दशमी शुरू हो जाएगी। इस योग में भक्त महालक्ष्मी की आराधना करने से अखंड कृपा बरसेगी। पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि, इस बार अष्टमी 13 अप्रैल को पुनर्वसु नक्षत्र में मनाई जाएगी।
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नवरात्रि पूजन
- फोटो : अमर उजाला
नवमी भी दोपहर में लग जाएगी। लेकिन जो लोग अष्टमी का व्रत रखते हैं वे शनिवार को ही व्रत रहें। अगले दिन 14 अप्रैल को सुबह 9:36 बजे तक कन्या भोज करा सकते हैं। महामहोपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्र की अष्टमी 13 अप्रैल को सूर्योदय व्यापिनी होने के कारण शनिवार को ही सुबह 11:41 बजे तक रहेगी।
इसी प्रकार सूर्योदय व्यापिनी नवमी 14 अप्रैल को सुबह 9:36 बजे तक रहेगी। यदि कोई अष्टमी का व्रत रखना चाहता है तो वह 13 अप्रैल को ही रख सकता है। अगले दिन रविवार यानी 14 अप्रैल को सुबह 9:36 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं। इसी दिन कन्याएं भी खिला सकते हैं।