माई सिटी रिपोर्टर आदर्श त्रिपाठी कानपुर। विदेश में फंसे भारतीयों को लाने का अभियान बृहस्पतिवार से शुरू हो गया इंग्लैंड में फंसे भारतीयों को लाने के लिए बृहस्पतिवार को विशेष फ्लाइट शुरू हुई। इस बात ने उन परिजनों को खासी राहत दी है जिनके अपने वहां फंसे हुए हैं हालांकि शहर के छात्रों की वापसी के लिए प्रक्रिया ना शुरू होने पर से उनके परिजन परेशान हैं। परिजनों ने इन छात्रों को लाने के लिए भी सरकार से पहल करने की मांग की है। जाजमऊ निवासी 5 छात्र वापसी के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। जाजमऊ निवासी टेनरी संचालक हाजी मोहम्मद एजाज के दो बेटे मोहम्मद अयाज और अमाज इंग्लैंड की नॉर्थम्प्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे हैं। अयाज यूनिवर्सिटी में बिजनेस स्टडी इन मार्केटिंग कोर्स में द्वितीय वर्ष और अमाज़ लेदर टेक्नोलॉजी में अंतिम वर्ष के छात्र हैं। जाजमऊ के ही जैद अशरफ, हबीब अंसारी, राफे इकबाल भी इसी यूनिवर्सिटी से विभिन्न कोर्स में पढ़ाई कर रहे हैं यह सभी एक साथ ही रहते हैं। देश में कोरोना महामारी के कारण लागू लॉक डाउन के कारण हवाई सेवा बंद होने के चलते सभी वहीं फंसे हुए हैं। मोहम्मद एजाज ने बताया कि मार्च में जब से कोरोना महामारी फैलना शुरू हुई, तभी से वह लगातार बेटों को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक ने बहुत सहयोग किया। एक आईएफएस अधिकारी पीयूष श्रीवास्तव भी बहुत मदद कर रहे हैं। वापसी की प्रक्रिया के तहत फंसे लोगों को ही ई-मेल के जरिए भारतीय दूतावास में आवेदन करना है। बेटों और उनके साथियों ने भी इंग्लैंड में भारतीय दूतावास के जरिए वापसी के लिए दो बार आवेदन कर रखा है। सरकार के फैसले से बेटों की वापसी की उम्मीद तो बंधी है। बृहस्पतिवार से फ्लाइट आने की शुरुआत हुई है लेकिन अभी तक बेटों या उसके साथियों से भारतीय दूतावास या किसी अन्य अथॉरिटी ने संपर्क नहीं किया है। वापसी से पहले कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इसके लिए कई दिन पहले से प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अधिकारियों की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार का संपर्क न करने से सभी परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। बेटों के साथ ईद मनाने के लिए पहले बुक करा लिए थे टिकट एजाज ने बताया कि ईद के त्योहार पर बेटे घर आते हैं। त्योहार और मई तक हालात सुधरने की उम्मीद में बेटों के लिए 13 मई के टिकट भी खरीद लिए थे। वापसी के निर्देश अभी बहुत स्पष्ट नहीं हैं। सरकार किसे वापस लेकर आएगी यह भी स्पष्ट नहीं है। अपनी कोशिश तो जारी है बाकी अब सब कुछ सरकार पर निर्भर है। सरकार और अधिकारी यदि संजीदगी दिखाए तो हम सभी के बच्चे त्योहार पर घर लौट सकते हैं। भारतीय दूतावास की ओर से संपर्क न किए जाने से बच्चों के साथ यहां परिजनों की भी चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि एयर इंडिया ने खरीदे गए टिकट का रिफंड भी देने से मना कर दिया है। कंपनी ने 1 साल के भीतर यात्रा करने का विकल्प दिया है। कोरोना के संक्रमण काल में कौन इंग्लैंड की यात्रा करेगा। पढ़ाई भी ऑनलाइन शुरू हो गई है। सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए। 13 मई से पहले यदि बच्चों की वापसी तय हो जाती है, तो यह टिकट ही काम आ जाएंगे।